शहर में जलसंकट के बीच एक ओर देवास बांध से पानी लाकर पिछोला और शहर की जल व्यवस्था को संभालने की कोशिश हो रही है, वहीं दूसरी ओर झील से निकल रहा हजारों लीटर पानी नालियों में बह रहा है। पिछोला-स्वरूप सागर क्षेत्र में पानी का तेज रिसाव सामने आया है। झील संवर्धन एवं विकास समिति के पूर्व सदस्य प्रो. महेश शर्मा ने जलदाय विभाग के अधिकारियों को मौके पर बुलाकर यह स्थिति दिखाई। यह रिसाव झरिया मार्ग पर मीट मार्केट के अंदर से और यहां से आगे बनी दुकानों के पास हो रहा है। इन्हीं हालातों के चलते पिछोला का जल स्तर एक इंच रोज घट रहा है। अधिकारियों ने भी बड़ी मात्रा में पानी बहता देखकर चिंता जताई। जिस मात्रा में यहां से पानी बह रहा है, उस हिसाब से देवास प्रथम (अलसीगढ़) से जितना पानी लाया गया था उतना पानी सालभर में पूरा व्यर्थ हो सकता है। उन्होंने रिसाव वाले स्थान पर ग्राउटिंग कर इसे बंद करने और पास में सहायक दीवार बनाने का सुझाव दिया। अफसरों का मेयर को सुझाव- पानी को पंप कर फिर झीलों में डालें स्वरूपसागर से हो रहे रिवास को लेकर अधिकारियों ने नगर निगम महापौर पारस सिंघवी से बात की। अफसरों ने रिसाव से निकल रहे पानी को तत्काल रोकने और निगम के माध्यम से उसे वापस झील में पंप करने का सुझाव दिया। यह स्थिति ऐसे समय सामने आई है, जब शहर में जलसंकट बना हुआ है और गर्मियों के लिए झीलों में उपलब्ध पानी को बचाने की जरूरत है। ऐसे में झील से निकलकर नालियों में जा रहा पानी चिंता बढ़ा रहा है। हाथीवाला पार्क की पार्किंग से भी व्यर्थ बह रहा पानी नगर निगम परिसर स्थित हाथीवाला पार्क की पार्किंग से भी दिन-रात भारी पंप के जरिये पानी नालियों में फेंका जा रहा है। यह पानी हर डेढ़ घंटे में पंप किया जा रहा है। उनके अनुसार इसकी मात्रा आकोदड़ा और मादड़ी से लाए गए पानी के बराबर हो सकती है। स्वरूप सागर के मीट मार्केट के पीछे से भी पानी लगातार बह रहा है। उन्होंने निगम से शहर में ऐसे सभी स्थान चिह्नित करने की मांग की, जहां बेसमेंट या अन्य स्थानों से पानी निकाला जा रहा है। उनका कहना है कि इस पानी को नालियों में बहाने के बजाय झीलों में वापस पहुंचाने की व्यवस्था होनी चाहिए। क्या मिसाल देंगे हम पिछले साल वाटर चैनल को बताया था अनूठा पिछले वर्ष झीलों की नगरी की जल व्यवस्था और वाटर चैनल को वैश्विक स्तर पर अनूठा बताया गया था। पानी की एक बूंद भी व्यर्थ नहीं जाने देने की व्यवस्था को समझने के लिए केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय ने देशभर के जल संसाधन मंत्रियों और प्रमुख शासन सचिवों के साथ ‘वाटर विजन : 2047’ के उद्देश्य से आयोजन किया था। अब जलसंकट के बीच झील का पानी नालियों में बहना उस व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है। जल स्रातों की इस तरह अनदेखी की गई तो झीलों का दुनिया को क्या मिसाल देगा।