चेतन द्विवेदी नगर निगम चुनाव से पहले वार्डवार मतदाता आंकड़ों ने शहर की लैंगिक तस्वीर का चौंकाने वाला पहलू सामने रखा है। 65 वार्डों में से एक भी वार्ड ऐसा नहीं, जहां महिला मतदाता पुरुषों से आगे हों। मतलब चुनावी मैदान में हर वार्ड में पुरुष वोटरों की संख्या अधिक है। कहीं यह अंतर महज कुछ वोटों का है तो कहीं सैकड़ों वोटरों की खाई है। पूरे निगम क्षेत्र में एक लाख 10 हजार 374 पुरुषों के मुकाबले एक लाख 882 महिला मतदाता हैं। महिलाओं से 9 हजार 492 अधिक पुरुष वोटर हैं। वार्डवार आंकड़ों को देखें तो यह अंतर समान नहीं है। कहीं महिला-पुरुष मतदाताओं की संख्या लगभग बराबर है तो कुछ वार्डों में पुरुष वोटरों की बढ़त काफी बड़ी है। सबसे बेहतर स्थिति वाले वार्ड में भी महिलाएं पुरुषों से आगे नहीं निकल पाई हैं। बल्कि कुछ वार्डों में तो यह खाई तीन गुना तक गहरी नजर आती है। यह असंतुलन पूरे शहर की सामाजिक- आर्थिक बनावट से जुड़ा एक व्यापक पैटर्न है, न कि किसी एक इलाके तक सीमित समस्या। शहर के सबसे घनी आबादी वाले, पुराने और व्यावसायिक इलाकों से जुड़े वार्डों में यह खाई सबसे ज्यादा गहरी मिली, जबकि अपेक्षाकृत छोटे या नए बसे वार्डों में यह फासला कुछ हद तक कम है।