जिले के ग्रामीण इलाकों में जल संकट की स्थिति बनी हुई है। भू-जल स्तर नीचे जाने से पीएचईडी के 10 प्रतिशत स्रोत दम ताोड़ चुके हैं। ऐसे में गांवों में जल संकट विकराल रूप ले रहा है। पीएचईडी के अधिकारियों का कहना है कि सामान्य जल स्तर से 10 से 15 मीटर नीचे जाने से ट्यूबवेल रिचार्ज नहीं हो रहे हैं और पानी की आवक खत्म हो गई है। विभाग ने ट्यूबवेल की गहराई बढ़ाने के लिए पत्र लिखे हैं। जिले के इन क्षेत्रों में गिरा भूजल स्तर, पशुधन व लोगों के लिए समस्या जिलेभर में पीएचईडी के कुल 7,676 जल स्रोत हैं। कम बारिश के चलते भू-जल स्तर में 10 से 15 मीटर तक की गिरावट दर्ज की गई है। ग्रामीण उपखंड प्रथम के जसाई, उण्डखा, बालेरा, जूनापतरासर, परो, मारूड़ी, सनावड़ा, कगाऊ, गरल, रानीगांव तथा ग्रामीण उपखंड द्वितीय के जोगासरिया, नागाणा के अलावा उत्पादन खंड के विशाला, गेहूं, लूणू खुर्द, सेजुओं की बस्ती, केरवा, नांद, सूरा, दूदाबेरी, बोड़ा क्षेत्र में जलस्तर रसातल में चले जाने से पानी की आवक पूरी तरह बंद हो गई है। सुरक्षा व उपयोगिता को देखते हुए विभाग ने इन प्रभावित स्रोतों को बंद कर दिया है। गडरारोड में बजरी बनी मुसीबत, 9 ट्यूबवैल ठप: राइजेप खंड के अधीन गडरारोड क्षेत्र में स्थिति और भी विकट है। वहां ट्यूबवैल के नीचे बजरी आ गई है। पीएचईडी के जल स्रोत >ट्यूबवैल - 1,811 >ओपनवेल- 761 >सिंगलफेज ट्यूबवैल- 190 >हैंडपंप- 4,914 जिले में कम बारिश के चलते कुछ सोर्स में पानी की आवक कम हुई है। गडरारोड में बजरी आने से ट्यूबवेल प्रभावित हैं, जिनकी गहराई बढ़ाने के लिए जीडब्ल्यूडी को पत्र लिखे गए हैं। - हजारीराम बालवां, एसई पीएचईडी बाड़मेर।