चित्तौड़गढ़ के मृगवन से गोगुंदा रेंज के मोकेला गांव में 10 चीतल (7 मादा और 3 नर) लाए जा रहे हैं। वन विभाग की टीम चित्तौड़गढ़ पहुंच चुकी है और चीतलों को शिफ्ट करने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। अब तक सज्जनगढ़ और जयसमंद अभयारण्य तक सीमित रहने वाले ‘सांभर-चीतल ब्रीडिंग प्रोजेक्ट’ को पहली बार प्रादेशिक वन मंडल की गोगुंदा रेंज में शुरू किया जा रहा है। इसका सीधा मकसद जंगल में शाकाहारी जीवों की संख्या बढ़ाना है, ताकि गोगुंदा और आसपास के क्षेत्रों में मौजूद तेंदुओं को पेट भरने के लिए इंसानी बस्तियों का रुख न करना पड़े। जिला मुख्यालय से 60 किमी दूर जसवंतगढ़ के मोकेला गांव में 4.5 हेक्टेयर दायरे में सुरक्षा घेरे के साथ बाड़ा तैयार किया गया है। चीतलों के लिए प्राकृतिक घास के मैदान (ग्रास लैंड) और पानी के लिए वाटर होल बनाए गए हैं। पास ही बनी नर्सरी को निगरानी नाके के रूप में बदला गया है, जहां वनकर्मी 24 घंटे सुरक्षा और सेहत पर नजर रखेंगे। बाड़े में प्रजनन के जरिए चीतलों की संख्या बढ़ाई जाएगी और फिर इन्हें खुले जंगल में छोड़ा जाएगा। बता दें इससे पहले जयसमंद सेंचुरी में भी ऐसा ही प्रयोग किया गया था, जो सफल रहा। 2024 : तेंदुए के हमले में हुई थी 7 मौतें= गोगुंदा में 18 सितंबर से 16 अक्टूबर 2024 के बीच तेंदुए के हमलों में 7 लोगों की जान चली गई थी। जांच में सामने आया था कि जंगलों में प्राकृतिक शिकार की भारी कमी हो गई है, जिससे तेंदुए भोजन की तलाश में गांवों की तरफ आ रहे हैं। उदयपुर जिले में करीब 130 तेंदुए हैं। इस प्रोजेक्ट से जंगलों में इको-सिस्टम मजबूत होगा और मानव-वन्यजीव संघर्ष पर विराम लगेगा।