जयपुर जंक्शन को रेलवे ने ए-1 श्रेणी में शामिल किया है, लेकिन सुरक्षा और यात्री सुविधाओं की जमीनी हकीकत इस दर्जे पर सवाल खड़े कर रही है। स्टेशन से रोजाना करीब डेढ़ लाख यात्री गुजरते हैं। त्योहारों पर यह संख्या ढाई लाख तक पहुंचने का अनुमान है। इसके बावजूद प्रवेश द्वारों पर लगे चार डोर फ्रेम मेटल डिटेक्टर (डीएफएमडी) में से तीन महीनों से बंद हैं। स्टेशन में प्रवेश के चोर रास्ते भी खुले हैं। एक तरफ रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) भीड़ नियंत्रण के लिए अतिरिक्त जवान और संसाधन मांग रहा है, दूसरी तरफ मौजूदा सुरक्षा उपकरण ही पूरी क्षमता से काम नहीं कर रहे। लगेज स्कैनर तीन महीने से ज्यादा खराब रहा। इस दौरान कई बड़े नेता और अधिकारी स्टेशन से गुजरे, लेकिन मशीन करीब 10 दिन पहले ही दोबारा चालू हुई। सवाल है कि इतने समय तक यात्रियों के सामान की जांच कैसे हुई? 1000 यात्रियों के लिए होल्डिंग एरिया का प्रस्ताव स्टेशन पर चार में से तीन डीएफएमडी बंद होने से सुरक्षा जांच पर सवाल हैं। वहीं, 159 सीसीटीवी कैमरे होने के बावजूद चोर रास्तों से लोग धड़ल्ले से आ-जा रहे हैं। दूसरी ओर आरपीएफ ने त्योहारों के दौरान 1000 यात्रियों की क्षमता वाला होल्डिंग एरिया, अतिरिक्त स्टाफ, बैरिकेडिंग और अलग प्रवेश-निकास व्यवस्था का प्रस्ताव दिया है। रेलवे की योजना बनाम जमीनी हकीकत करोड़ों की सुविधाओं के दावे, यात्रियों को बैठने के लिए कुर्सियां तक नहीं स्टेशन पर पर्याप्त कुर्सियां नहीं होने से यात्री बुकिंग हॉल, इन्क्वायरी हॉल, कॉनकोर्स और प्लेटफॉर्म पर जमीन पर बैठने या लेटने को मजबूर हैं। पार्किंग भी बदहाल है। वाणिज्य विभाग की ओर से पे-एंड-यूज, पार्सल सहित कई यात्री सुविधाएं लंबे समय से कोटेशन के आधार पर संचालित की जा रही हैं। इससे यात्रियों से मनमाना शुल्क वसूलने और नियमित टेंडर नहीं होने पर सवाल उठ रहे हैं। मिलीभगत और रेलवे के राजस्व में लीकेज की आशंका भी जताई जा रही है।