शादी विवाह या भंडारे के अगले दिन अक्सर सड़कें डिस्पोजल प्लेटों, गिलासों और चम्मचों से पटी नजर आती हैं। जयपुर के विद्याधर नगर निवासी 80 वर्षीय गणपतलाल खुराणा ने इस समस्या का समाधान ढूंढने के लिए अपने ही घर को बर्तन बैंक में बदल दिया। अब उनके यहां से सामाजिक, धार्मिक और पारिवारिक आयोजनों के लिए 10 हजार से अधिक स्टील के बर्तन निशुल्क दिए जाते हैं, ताकि एक भी डिस्पोजल प्लेट इस्तेमाल न हो। राजस्व विभाग से सेवानिवृत्त गणपतलाल खुराणा, कांता फाउंडेशन ट्रस्ट के माध्यम से पिछले एक वर्ष से यह अभियान चला रहे हैं। उन्होंने करीब 8 लाख रुपए खर्च कर स्टील की थालियां, कटोरियां, गिलास और चम्मच खरीदे। शुरुआत में प्रतीकात्मक रूप से एक रुपए प्रति सेट शुल्क रखा, लेकिन बाद में इसे पूरी तरह निशुल्क कर दिया। मुफ्त बर्तन देने की एक ही शर्त...भविष्य में एक भी प्लास्टिक का उपयोग नहीं करेंगे