भले ही नगर निगम चुनाव-2026 के परिणामों में भाजपा ने 80 में से 53 सीटों पर एकतरफा जीत दर्ज कर उदयपुर शहर के अपने अभेद्य गढ़ पर फिर परचम लहरा रखा है, लेकिन इस बार 21 सितंबर को होने वाले मेयर चुनाव में क्रॉस वोटिंग के डर ने नींद भी उड़ा रखी है। भाजपा पदाधिकारियों को अब बाड़ेबंदी में पार्षदों को संगठन सर्वोपरि का पाठ पढ़ाकर वोट भाजपा प्रत्याशी पारस सिंघवी को ही देने के लिए प्रेरित करना पड़ रहा है। पार्षदों को दो दिनों से देव दर्शन भी कराए जा रहे हैं, ताकि वे घुल-मिल जाएं। श्रीनाथजी के बाद शुक्रवार को इन पार्षदों को सांवलिया सेठ के दर्शन कराए गए, जिसमें शहर विधायक ताराचंद जैन भी शामिल रहे। दूसरी तरफ 23 सीटें जीतने वाली कांग्रेस ने भी रात 8:30 बजे अचानक बाड़ेबंदी कर सियासी पारा चढ़ा दिया। शहर जिला कांग्रेस अध्यक्ष फतेह सिंह राठौड़ की पत्नी वार्ड 17 से पार्षद डॉ. पूनम कंवर राठौड़ मेयर प्रत्याशी हैं। बाड़ेबंदी में कांग्रेस के 23 में से 20 पार्षद पहुंच चुके हैं। बाकी तीन शनिवार को पहुंचेंगे। हालांकि कांग्रेस शहर जिलाध्यक्ष राठौड़ ने बाड़ेबंदी की बात को फिलहाल खारिज किया है। मुकाबला रोचक होते ही 3 निर्दलीयों व 1 अन्य की भाजपा-कांग्रेस ने तलाश तेज कर दी है। तीन निर्दलीयों में 1 भाजपा के बागी और 2 कांग्रेस के बागी पार्षद जीते हैं। खास बात यह है कि उदयपुर शहर में जैन समाज के मजबूत सामाजिक, राजनीतिक और संगठनात्मक प्रभाव को देखते हुए भाजपा ने एक बार फिर जैन समाज के चेहरे पर दांव खेला है। अब शहर की कमान शहर विधायक ताराचंद जैन और भावी मेयर पारस सिंघवी के हाथों में होगी। शहर में जैन प्रभुत्व: कटारिया-ताराचंद के बाद अब सिंघवी शहर की राजनीति में भाजपा का जैन कार्ड हमेशा से सबसे भरोसेमंद दांव रहा है। विधानसभा से लेकर नगर निगम के शीर्ष पद तक, पार्टी ने हमेशा इसी सामाजिक समीकरण को प्राथमिकता दी है। निगम के इतिहास पर नजर डालें तो वर्ष 1994 में किरण माहेश्वरी के अलावा जैन समाज के प्रतिनिधियों के रूप में 2009 में रजनी डांगी और 2014 में चंद्रसिंह कोठारी ने निगम बोर्ड की कमान संभाली थी। वहीं विधानसभा में लगातार दो दशक तक गुलाबचंद कटारिया और उनके बाद अब ताराचंद जैन को टिकट देकर भाजपा ने इसी दबदबे को कायम रखा। उदयपुर शहर में जैन समाज का बड़ा वोट बैंक है। भाजपा में अंदरखाने अभी भी बागी सुर भाजपा में मेयर पद के दावेदारों में गिने गए वरिष्ठ नेता प्रमोद सामर व पूर्व जिलाध्यक्ष दिनेश भट्ट के समर्थकों के बीच अंदरखाने खींचतान चल रही है। सिंघवी को मेयर पद तक पहुंचाने में शहर जिलाध्यक्ष की भूमिका अहम बताई जा रही है। सूत्रों के मुताबिक शहर जिलाध्यक्ष द्वारा पार्षदों से पर्चियों पर मेयर प्रत्याशियों के लिखवाए गए नामों में 30 से अधिक पर्चियों पर प्रथम नाम सिंघवी, 15 से अधिक पर प्रमोद सामर व 10 से अधिक पर्चियों पर दिनेश भट्ट के नाम की चर्चा है। हालांकि, अभी तक किसी पार्षद ने यह आरोप नहीं लगाए हैं कि उन्हें किसका नाम प्रथम लिखना है या इसके लिए उन्हें क्या बोला गया? शहर तक फतहनगर की जंग, चपलोत के घर यूडीए का नोटिस फतहनगर पालिका में चेयरमैन पद के लिए कांग्रेस की सोसर ने नामांकन वापस ले लिया है। अब यहां भाजपा की सीमा और भाजपा के पूर्व चेयरमैन राजेश चपलोत की पत्नी ममता चपलोत निर्दलीय के रूप में मैदान में हैं। दोनों में 21 सितंबर को मुकाबला होगा। इससे पूर्व भाजपा के पूर्व चेयरमैन ने पत्नी को निर्दलीय मैदान में उतारा तो बीती रात उनके उदयपुर के मकान को अवैध निर्माण बताते हुए नोटिस दे दिया गया। एक दिन पहले फतहनगर में होटल पर पालिका ने नोटिस लगाया था। यूडीए तहसीलदार रणजीत बिट्‌ठू के नाम से के नाम से बीती रात उदयपुर के रूपसागर रोड स्थित लवली एस्टेट में चपलोत के आवास पर नोटिस दिया गया। नोटिस जारी किया गया है। चपलोत के बेटे ने बताया कि जल्दबाजी में दिए गए नोटिस में कई ग​ड़बड़ियां हैं। इस पर तारीख 15 सितंबर अंकित है और उनके उदयपुर घर पर नोटिस 17 सितंबर की रात 9 बजे लाया गया। फतहनगर-सनवाड़ पालिका चुनाव में 25 वार्ड में से भाजपा ने 13 और कांग्रेस ने 12 वार्ड जीते हैं। वहां चेयरमैन का पद अनारक्षित महिला के लिए रिजर्व है।