जैन श्वेतांबर तेरापंथ धर्मसंघ के 33वें विकास महोत्सव पर जैन विश्व भारती परिसर में दीक्षा समारोह हुआ। आचार्य महाश्रमण ने एक मुनि, पांच साध्वियों, एक समणी सहित सात मुमुक्षुओं को दीक्षा दी। समारोह में बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे। दीक्षा के लिए बाबूलाल बाफना, सुमन नाहटा, सुमन बैद, अर्चना मेहता, रुचिका मालू, कोमल भंसाली, भावना नाहटा ने प्रार्थना की। परिजनों की लिखित और मौखिक आज्ञा के बाद आचार्य महाश्रमण ने दीक्षार्थियों की भावनाओं का परीक्षण किया। आर्षवाणी के साथ दीक्षा संस्कार कराया। दीक्षा के बाद बाबूलाल बाफना का नाम मुनि हितकुमार रखा गया। सुमन नाहटा का नाम साध्वी सुपार्श्वप्रभा हुआ। सुमन बैद का नाम साध्वी ओमप्रभा रखा गया। अर्चना मेहता का नाम साध्वी अर्चनाप्रभा हुआ। रुचिका मालू का नाम साध्वी धर्मार्थप्रभा रखा गया। कोमल भंसाली का नाम साध्वी कोमलप्रभा हुआ। भावना नाहटा का नाम समणी भक्तिप्रज्ञा रखा गया। आचार्य महाश्रमण ने नवदीक्षितों को संयम, यतना, आत्मकल्याण के मार्ग पर आगे बढ़ने की प्रेरणा दी। आचार्य महाश्रमण ने कहा कि धर्म की साधना मंगलकारी होती है। दीक्षा समारोह धर्म के प्रति संकल्प लेने का अवसर है। सात मुमुक्षु इसी संकल्प के साथ चारित्र जीवन में प्रवेश कर रहे हैं। उन्होंने नवदीक्षित साधु-साध्वियों और समणी को संयमयुक्त जीवन जीने की प्रेरणा दी। आचार्य महाश्रमण ने बताया कि 90 वर्ष पहले इसी दिन आचार्य तुलसी ने गंगापुर में तेरापंथ धर्मसंघ का दायित्व संभाला था। उन्होंने 2036 में आचार्य तुलसी के आचार्य पदारोहण शताब्दी सम्पन्नता समारोह मनाने की घोषणा की। आचार्य महाप्रज्ञ की दीक्षा के 100 वर्ष पूरे होने पर दीक्षा शताब्दी सम्पन्नता समारोह मनाने की भावना भी जताई।