कोटा रोड स्थित महावीर गार्डन में चल रही श्रीराम कथा के चौथे दिन रविवार को स्वयंवर लीला और रामविवाह प्रसंग का वर्णन किया गया। कथावाचक संत अर्जुनरामजी महाराज ने भगवान श्रीराम द्वारा शिव धनुष उठाने और धनुष भंग करने की कथा सुनाई। इसके बाद श्रीराम और माता सीता के विवाह प्रसंग को विस्तार से रखा। अर्जुनरामजी महाराज ने कहा कि श्रीराम का जीवन केवल कथा का विषय नहीं है। इसे व्यवहार में उतारने से परिवार में संस्कार और समाज में सद्भाव मजबूत होता है। उन्होंने रामविवाह को मर्यादा, त्याग, समर्पण और आदर्श दांपत्य का प्रतीक बताया। उन्होंने कहा कि श्रीराम ने परिस्थितियां कैसी भी हों, धर्म और सत्य का मार्ग नहीं छोड़ा। माता सीता ने त्याग, समर्पण और धैर्य का उदाहरण प्रस्तुत किया। कथा में परशुराम और लक्ष्मण के संवाद का प्रसंग भी सुनाया गया। कथावाचक ने कहा कि इस प्रसंग में लक्ष्मण के तेज के साथ श्रीराम की विनम्रता और मर्यादा का संतुलन दिखता है। उन्होंने कहा कि क्रोध बुद्धि को भ्रमित करता है, जबकि संयम सही निर्णय लेने की शक्ति देता है। श्रद्धालुओं से क्रोध, अहंकार और द्वेष से दूर रहने की अपील की गई। रामविवाह प्रसंग के दौरान पंडाल में जयकारे लगे। भजनों पर श्रद्धालुओं ने सहभागिता की। कथावाचक ने कहा कि धर्म केवल पूजा-पाठ तक सीमित नहीं है। सत्य, सेवा, करुणा, संस्कार और बड़ों का सम्मान आचरण में दिखना चाहिए। आयोजन समिति के मदनमोहन गुप्ता के अनुसार कथा में शक्करगढ़ के महामंडलेश्वर जगदीशपुरी महाराज भी मौजूद रहे। कार्यक्रम में पूर्व मंत्री प्रमोद जैन भाया, जिला प्रमुख उर्मिला जैन भाया और पूर्व विधायक पानाचंद मेघवाल भी पहुंचे। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने कथा श्रवण किया।