प्रदेश के वकीलों की सुरक्षा से जुड़े एडवोकेट्स प्रोटेक्शन बिल-2023 पर लंबे समय से निर्णय नहीं होने पर हाईकोर्ट ने नाराजगी जताई है। जस्टिस महेन्द्र कुमार गोयल और जस्टिस भुवन गोयल की खंडपीठ ने कहा है कि सरकार चार सप्ताह में बिल पर अंतिम निर्णय लें। वरना मुख्य सचिव हाईकोर्ट में पेश होकर स्पष्टीकरण दें। खण्डपीठ ने यह निर्देश हाईकोर्ट बार एसोसिएशन जयपुर के पूर्व अध्यक्ष प्रहलाद शर्मा की याचिका पर सुनवाई करते हुए दिए। कोर्ट ने पूछा-मई 2025 से निर्णय क्यों नहीं लिया हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से पूछा कि मई 2025 के बाद से इस बिल को लेकर कोई भी कार्रवाई क्यों नहीं हुई। इस पर सरकार ने कहा कि भारत सरकार के गृह मंत्रालय की ओर से राज्य के विधि एवं विधिक कार्य विभाग के प्रमुख सचिव को 26 मई 2026 को लिखे गए पत्र की एक कॉपी पेश की। इस पत्र के जरिए राज्य सरकार से एडवोकेट प्रोटेक्शन बिल 2023 पर पुनर्विचार करने और उसकी समीक्षा करने या उसे वापस लेने का आग्रह किया था। इसके बाद 25 जून को वापस टिप्पणियां मांगी गई थीं। लेकिन इस विषय पर अभी तक कोई निर्णय नहीं लिया है। अदालत ने दोनों पक्षों को सुनकर राज्य सरकार को बिल पर अंतिम निर्णय लेने के लिए समय दिया। गहलोत सरकार के समय विधानसभा से पास हुआ था बिल बता दें कि यह बिल गहलोत सरकार के समय साल 2023 में विधानसभा से पास हुआ था। लेकिन बिल पर आगे कोई कार्रवाई नहीं हो सकी। याचिका में प्रदेश के वकीलों के प्रोटेक्शन सहित वकीलों के वेलफेयर फंड में राशि का अंशदान नहीं देने और नए वकीलों को स्टाइपेंड देने की मांग की है। इसमें कहा कि अन्य राज्यों में वकीलों के वेलफेयर के लिए स्कीम हैं लेकिन राजस्थान के वकील इससे वंचित हैं।