अजमेर में एक साल के मासूम ने खेलते समय 9 मैग्नेट बॉल्स निगल ली, जो आंतों में चिपक गई। जिससे उसकी आंतों में 16 छेद हो गए। जवाहरलाल नेहरू(JLN) हॉस्पिटल के डॉक्टरों ने 4 घंटे तक जटिल सर्जरी कर मैग्नेट बॉल निकालकर बच्चे की जान बचाई। डॉक्टरों ने बताया- बच्चा पूरी तरह से स्वस्थ है और उसे आज (सोमवार) डिस्चार्ज कर दिया गया है। JLN हॉस्पिटल एवं मेडिकल कॉलेज के शिशु शल्य विभाग की टीम ने 16 सितंबर को सफल सर्जरी की थी। डॉक्टरों के मुताबिक, भारत में ये दूसरा केस है, इससे पहले तेलंगाना में आंत में 15 छेद का ऑपरेशन हुआ था। बच्चे का पेट फूलने लगा, हालत बिगड़ी JLN मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य एवं नियंत्रक डॉ. अनिल सामरिया ने बताया- 14 सितंबर को बच्चे ने मैग्नेट बॉल निगल लिया था। उसे स्थानीय स्तर पर मेडिकल ट्रीटमेंट दिया गया। लेकिन समस्या का पता नहीं चला। धीरे-धीरे बच्चे की स्थिति बिगड़ने लगी। 15 सितंबर को परिजन बच्चे को JLN हॉस्पिटल के शिशु शल्य विभाग (Department of Pediatric Surgery) में लेकर पहुंचे, जहां डॉ. गरिमा अरोड़ा ने बच्चे की जांच करवाई। आंतों में 16 छेद होने से संक्रमण का हो गया था खतरा डॉ. अनिल सामरिया ने बताया- इन छेदों के कारण आंतों में गंभीर क्षति, संक्रमण एवं रुकावट आ गई थी। बच्चे का पेट लगातार फूल रहा था और उसकी स्थिति अत्यंत गंभीर हो चुकी थी। डॉक्टरों ने तुरंत कॉम्पलेक्स सर्जरी करने का निर्णय लिया। डॉक्टरों ने आंतों में हुए 16 छेदों और चुंबकीय गोलियों के कारण हुई गंभीर क्षति का उपचार किया। जेएलएन अस्पताल के डिप्टी सुपरिंटेंडेंट डॉ अमित यादव ने बताया ऑपरेशन में डॉ. गरिमा अरोड़ा, डॉ. दिनेश बारोलिया एवं शिशु शल्य विभाग की टीम के साथ एनेस्थीसिया विभाग के डॉ. अरविंद खरे, डॉ. रतन यादव एवं उनकी टीम शामिल रही। सफल उपचार के बाद सोमवार को हॉस्पिटल से डिस्चार्ज कर दिया गया है। डॉक्टर की अभिभावकों को सलाह डॉ. गरिमा अरोड़ा ने सभी अभिभावकों को सलाह दी है कि खेल में इस्तेमाल की जाने वाली वस्तुएं जैसे कि बटन बैटरीज, मैग्नेटिक बॉल्स, नुकीले पदार्थ और घर में फैला हुआ सामान जैसे कि सेफ्टी पिन, ऑल पिन इत्यादि बच्चे खेल-खेल में निगल लेते हैं और ऑपरेशन का कारण बन सकते हैं। इसलिए माता-पिता को इसके लिए जागरूक होना चाहिए, ताकि किसी भी दुर्घटना को टाला जा सके। यदि एक से ज्यादा मैग्नेटिक बॉल्स या मेटल और मैग्नेटिक बॉल्स निगल ली जाए तो नुकसान होने की संभावना बहुत बढ़ जाती है। क्योंकि यह बॉल्स आंत में जगह-जगह जाती है और फिर एक दूसरे को आकर्षित करती हैं और उनके बीच आने वाली सारी आंत डैमेज हो जाती है। ……… ये खबरें भी पढे़ं… 1…युवक का जबड़ा टूटकर नीचे गिरा, डॉक्टरों ने जोड़ा:डॉक्टर्स बोले-दुर्लभ स्थिति में हुआ ऑपरेशन, जीभ गले में फंसने से जा सकती थी जान अजमेर जिले में सड़क हादसे में युवक का जबड़ा कटकर नीचे गिर गया। गंभीर रूप से घायल युवक को JLN हॉस्पिटल में भर्ती करवाया गया। जहां डॉक्टरों ने जटिल ऑपरेशन कर युवक के जबड़े को दोबारा जोड़ दिया। (पूरी खबर पढें) 2….जेएलएन-अस्पताल में 4 साल के मासूम की हुई जटिल सर्जरी:गर्म तेल से झुलसने के बाद प्राइवेट पार्ट के पास रास्ता हो गया था बंद अजमेर के जेएलएन अस्पताल के डॉक्टरों ने 4 वर्षीय मासूम की जटिल और दुर्लभ प्लास्टिक सर्जरी की। अस्पताल के प्रिंसिपल डॉ. अनिल सामरिया, अधीक्षक डॉ. अरविंद खरे, डिप्टी सुपरिंटेंडेंट डॉ. अमित यादव और प्लास्टिक सर्जरी विभागाध्यक्ष डॉ. नेपो विद्यार्थी ने गुरुवार को मामले की जानकारी संयुक्त रूप से दी। (पूरी खबर पढ़ें…) 3…..जन्म से दिल में छेद था,28 साल बाद पता चला:सांस फूलने से परेशान थी महिला, डॉक्टर बोले- देर होती तो ऑपरेशन संभव नहीं होता अजमेर के जेएलएन हॉस्पिटल में एक महिला के दिल के छेद का सफल ऑपरेशन किया गया है। पुष्कर की 28 साल की महिला के जन्म से दिल में 1.79 सेंटीमीटर का छेद (एट्रियल सेप्टल डिफेक्ट-एएसडी) था, लेकिन 28 साल बाद इसका पता चला। (पूरी खबर पढ़ें…)