अजमेर की पॉक्सो कोर्ट संख्या-1 के विशिष्ट न्यायाधीश हेमंत सिंह बघेल ने नाबालिग लड़की से रेप और मानव तस्करी के मामले में तीन आरोपियों को दोषी करार दिया है। कोर्ट ने मुख्य आरोपी विष्णु को अलग-अलग धाराओं में 10 साल के कठोर कारावास और 51 हजार रुपए जुर्माने की सजा सुनाई। वहीं सहआरोपी आदित्य उर्फ सोनू और महेंद्र को भी 10-10 साल की जेल और 30-30 हजार रुपए जुर्माने से दंडित किया। विशेष न्यायाधीश हेमंत सिंह बघेल ने अपनी टिप्पणी में लिखा- मानव तस्करी एक अत्यंत जघन्य, अमानवीय और संगठित अपराध है। जो आधुनिक समय में गुलामी का सबसे क्रूर रूप है। ये व्यक्ति की स्वतंत्रता, गरिमा व अधिकारों को पूरी तरह नष्ट कर देता है। यह केवल व्यक्तिगत स्तर का शोषण नहीं है, बल्कि यह एक ऐसा खतरनाक सिंडिकेट है। जो मासूमों को जबरन श्रम, देह व्यापार और अवैध गतिविधियों में धकेलकर समाज की नींव को अंदर से खोखला कर रहा है। पीड़ितों को आजीवन शारीरिक और मानसिक प्रताड़ना का सामना करना पड़ता है। जो किसी भी सभ्य समाज के माथे पर एक गहरा कलंक है। इस भयानक अपराध पर प्रभावी लगाम लगाने और भविष्य में ऐसा करने वालों के मन में कानून का डर पैदा करने के लिए यह अत्यंत आवश्यक है कि अपराधियों को मिसाल कायम करने वाली कड़ी सजा दी जाए। जांच अधिकारी की लापरवाही पर भी जताई नाराजगी फैसले में कोर्ट ने जांच अधिकारी की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर टिप्पणी की। न्यायाधीश ने कहा कि अनुसंधान अधिकारी ने मामले में 'मात्र खानापूर्ति' की, जिसका लाभ कुछ धाराओं में आरोपियों को मिला। कोर्ट ने विशेष रूप से पीड़िता की उम्र से जुड़े साक्ष्यों की जांच में लापरवाही का उल्लेख किया। आदेश के मुताबिक, POCSO मामलों में पीड़िता की आयु से संबंधित साक्ष्य बेहद महत्वपूर्ण होते हैं, लेकिन जांच अधिकारी ने इस पहलू पर गंभीरता से अनुसंधान नहीं किया। जांच अधिकारी ने अपने अधीनस्थ कर्मचारियों को ओडिशा भेजकर स्कूल का रिकॉर्ड मंगवाया था। यह रिकॉर्ड उड़िया भाषा में था। कोर्ट ने कहा कि जांच अधिकारी ने खुद स्वीकार किया कि उसे उड़िया भाषा का ज्ञान नहीं था, इसके बावजूद रिकॉर्ड का हिंदी या अंग्रेजी में अनुवाद करवाकर उसमें दर्ज तथ्यों को समझने और आगे जांच करने का प्रयास नहीं किया गया। 2024 में चाइल्ड लाइन ने बालिका को किया था बरामद मामला 2024 का है। बाल कल्याण समिति के निर्देश पर चाइल्ड लाइन ने बालिका को बरामद किया था। बालिका ने बताया कि उसकी मां और अन्य लोग उसे ओडिशा से बूंदी लेकर आए थे। यहां उस पर जबरन शादी के लिए दबाव बनाया गया। बालिका के विरोध करने पर उसके साथ मारपीट की गई और उसे अलग-अलग लोगों के पास रखा गया। बालिका ने चाइल्ड लाइन को आरोपियों के बारे में जानकारी दी। इसके बाद पुलिस ने आरोपियों को गिरफ्तार किया। मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने कोर्ट में 16 गवाह और 42 दस्तावेज पेश किए। साक्ष्यों और सुनवाई के बाद कोर्ट ने तीनों आरोपियों को दोषी मानते हुए सजा सुनाई। साथ ही पीड़िता को पीड़ित प्रतिकर योजना के तहत सहायता राशि दिलाने के आदेश दिए।