एसी ट्रेनों में यात्रियों को मिलने वाले कंबल की स्वच्छता को लेकर रेलवे ‘कवर वाला कंबल’ मॉडल सभी ट्रेनों में लागू करने की तैयारी कर रहा है। उत्तर पश्चिम रेलवे में अभी चुनिंदा ट्रेनों और एसी कोच में ब्लैंकेट कवर दिए जा रहे हैं। विभागीय योजना के अनुसार नवंबर तक सभी ट्रेनों की सभी एसी श्रेणियों को इसके दायरे में लाने की तैयारी है। इस प्रयोग में जयपुर मंडल आगे है। यहां ट्रेन नंबर 19711, 12981, 22977 और 20993 के सभी एसी कोच में ब्लैंकेट कवर उपलब्ध कराए जा रहे हैं। सीपीआरओ अमित सुदर्शन के अनुसार जयपुर मंडल की 4 ट्रेनों में यह व्यवस्था सभी एसी कोच तक पहुंच चुकी है। बीकानेर और जोधपुर मंडल की कई ट्रेनों में अभी यह फर्स्ट एसी, ए1-ए2 या अन्य चुनिंदा कोच तक सीमित है। अगले चरण की चुनौती कवर की पर्याप्त उपलब्धता के साथ कलेक्शन, धुलाई, पैकिंग और दोबारा ट्रेन तक सप्लाई की होगी। कंबल के लिए अलग कवर जोड़ने से लिनेन का वॉल्यूम बढ़ गया। एसी कोच में पहले से चादर, तकिए के कवर, कंबल और अन्य बेडरोल के बैग रहते हैं। ऐसे में अतिरिक्त लिनेन रखने की जगह की समस्या सामने आई। जयपुर में प्रयोग के तौर पर एक एसी कोच के एक टॉयलेट को मॉडिफाई कर ‘लिनेन स्टोरेज रूम’ बनाया है। टॉयलेट के अंदर अलग-अलग रैक पर लिनेन बैग रखने की व्यवस्था की है। प्रयोग सफल रहा तो इस मॉडल को देशभर की ट्रेनों में लागू किया जाएगा।