शहर में संपत्तियों की पहचान और उनके रिकॉर्ड के प्रबंधन का तरीका अब पूरी तरह बदलने जा रहा है। स्वायत्त शासन तथा शहरी विकास एवं आवासन (यूडीएच) विभाग ने उदयपुर सहित प्रदेश की सभी शहरी संस्थाओं में ‘प्रॉपर्टी आईडी मॉड्यूल’ लागू करने की तैयारी पूरी कर ली है। इससे हर संपत्ति की डिजिटल पहचान होगी। यह नई व्यवस्था 28 सितंबर से लागू होगी, जिसके तहत संपत्तियों की पहचान और उनके रिकॉर्ड को एक ही पोर्टल पर अपलोड कर व्यवस्थित किया जाएगा, ताकि एक ही जगह से सारा ब्योरा देखा और अपडेट किया जा सके। सिर्फ निगम नहीं, इन संस्थाओं की संपत्तियां भी होंगी शामिल यह मॉड्यूल केवल नगर निगम तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसका दायरा अन्य विकास प्राधिकरणों और निकायों तक फैला होगा। इसके तहत नगर विकास न्यास, विकास प्राधिकरण, राजस्थान हाउसिंग बोर्ड, रीको और स्थानीय निकाय विभाग से जुड़ी सभी संस्थाओं की संपत्तियों को एक डिजिटल व्यवस्था में लाकर पंजीकृत किया जाएगा। इन विभागों को ऑनलाइन पोर्टल में काम करने वाले अधिकारियों-कर्मचारियों की जानकारी दर्ज करने और जरूरी रिकॉर्ड तैयार करने के निर्देश दिए हैं। संपत्ति को मिलेगा यूनिक नंबर, इससे दिखेगा रिकॉर्ड अधिकारियों और कर्मचारियों को दी जा रही ट्रेनिंग: व्यवस्था को सुचारू रूप से संचालित करने के लिए संबंधित विभागों के अधिकारियों और कर्मचारियों का प्रशिक्षण गुरुवार से शुरू हो गया है। इसमें आईडी जेनरेट करने, सत्यापन करने और ऑनलाइन डेटा संशोधन करने का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जा रहा है। सरकार ने सभी विभागों को निर्देश दिए हैं कि वे इस ऑनलाइन सिस्टम का उपयोग करने वाले अपने कर्मियों की जानकारी जल्द से जल्द पोर्टल पर दर्ज करें। इस नई प्रणाली के तहत सरकारी और निजी दोनों प्रकार की संपत्तियों को एक विशिष्ट (यूनिक) पहचान नंबर जारी किया जाएगा। इसी नंबर के आधार पर संपत्ति का पूरा रिकॉर्ड ऑनलाइन देखा जा सकेगा। सरकार ने पोर्टल पर प्रॉपर्टी आईडी बनाने, उसकी जांच करने और भविष्य में आवश्यकतानुसार जानकारी में बदलाव (अपडेट) करने का प्रावधान भी रखा है। फायदा: गलत विभाग में आवेदन से मिलेगी मुक्ति वर्तमान में आमजन को अक्सर यह स्पष्ट नहीं होता कि उनकी संपत्ति किस विभाग के क्षेत्राधिकार में आती है। इसके चलते म्यूटेशन, लैंड यूज चेंज या भवन निर्माण की अनुमति के लिए लोग गलत विभाग में ऑनलाइन आवेदन कर देते थे, जिसे विभाग निरस्त कर देता था। नई व्यवस्था में यदि कोई नागरिक गलत विभाग में आवेदन कर भी देता है, तो प्रॉपर्टी आईडी मॉड्यूल उसे स्वतः सही विभाग में स्थानांतरित कर देगा। इससे लोगों को सरकारी दफ्तरों के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे और समय की बचत होगी।