अलवर नगर निगम के पहले चुनाव में 344 प्रत्याशियों का सियासी भविष्य ईवीएम में कैद हो गया है। शहर की सरकार तय करने के लिए इस बार भी बंपर वोटिंग हुई है। करीब 65.75 फीसदी वोटिंग ने दोनों प्रमुख दलों की धड़कनें बढ़ा दी है। SIR के बाद 2019 के लगभग बराबर वोटिंग के कारण कयास लगाए जा रहे हैं कि इस बार भी पिछले चुनाव की तरह निर्दलीय ही ‘किंग मेकर’ हो सकते हैं। हालांकि 14 सितंबर को परिणामों के बाद तस्वीर साफ हो जाएगी। पिछली बार 65.36% वोटिंग हुई थी। अलवर नगर परिषद में सबसे अधिक वोटिंग साल 2014 में हुई थी। तब प्रदेश में मोदी लहर के असर की वजह से शहर में 70 प्रतिशत वोट पड़े थे। अलवर नगर निगम के क्षेत्र में देश व प्रदेश के कई बड़े नेताओं का वोट यहीं डला है। इनमें प्रमुख रूप से केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव, राजस्थान में नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली, पूर्व केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह, वन राज्य मंत्री संजय शर्मा सहित अनेक पार्टी व संगठन के नेता शामिल हैं। मेयर की कुर्सी के लिए कांग्रेस ने अपने कुछ पार्षदों को एक जगह बुलाना शुरू कर दिया है। बीजेपी भी गुपचुप रणनीति बना रही है। निर्दलीय ही बनाएंगे शहर की सरकार, बाड़ेबंदी भी होगी राजनीति के जानकारों का कहना है कि अलवर नगर निगम के चुनाव में निर्दलीय ही शहर की सरकार बनाएंगे। पिछले चुनाव में भी 19 निर्दलीय जीतकर आए थे। इस बार भी उनकी संख्या अच्छी–खासी रहने की संभावना है। पार्टियों के बड़े नेताओं ने निर्दलियों को अपने पक्ष में लेने के लिए गणित लगाना शुरू भी कर दिया है। वैसे तो 14 सितंबर को परिणाम आने के बाद ही पूरी तस्वीर साफ होगी। लेकिन कुछ निर्दलीय ऐसे हैं जिनका चुनाव जीतना करीब-करीब तय है। इसके लिए बाड़ेबंदी भी की जा सकती है। 20 साल लगातार बन चुका है बीजेपी का बोर्ड अलवर पहली बार नगर निगम बना है। इससे पहले यह नगर परिषद थी। 2005 के बाद से रिकॉर्ड को देखें तो यहां 4 बार बीजेपी का बोर्ड बना है। केवल एक बार कांग्रेस का बोर्ड बना है। उस बोर्ड का भी पूरा कार्यकाल नहीं हो सका। बीच में ही बीजेपी के उप सभापति को सभापत बनाना पड़ गया था। इसलिए पुराने रिकॉर्ड को देखकर तो यही कहा जा सकता है। अलवर नगर निगम बीजेपी के लिए सुरक्षित है, लेकिन यहां निर्दलीय की संख्या बढ़ने से पार्टी को मेयर बनाने में जोड़ -तोड़ करना पड़ सकता है। मेयर के लिए दोनों पार्टियों में बड़े नेताओं के नजदीकी दावेदार अलवर को नगर परिषद से नगर निगम बने तीन साल हुए हैं। पिछली कांग्रेस सरकार ने जाते-जाते निगम बनाने की घोषणा की थी। उसके बाद यह निगम का पहला चुनाव है और महिला आरक्षित है। इस कारण निगम की पहली मेयर महिला बनेगी। इस कारण कई नेताओं की पत्नी ने चुनाव लड़ा है। बीजेपी व कांग्रेस में ऐसे 4-4 प्रमुख मेयर के दावेदार हैं। अब देखना यह है कि उनमें से कितने नेता वार्ड पार्षद का चुनाव जीतकर आते हैं। वोटिंग के दौरान कुछ के जीतने की पूरी संभावना हो गई। कुछ के यहां त्रिकोणीय मुकाबला है। कुछ का गणित बागियों ने बिगाड़ दिया। बीजेपी से पूर्व चेयरमैन अजय अग्रवाल की पत्नी सुमनलता अग्रवाल, वरिष्ठ नेता नीलेश खंडेलवाल की पुत्रवधु अपूर्वा शर्मा, पूर्व प्रत्याशी धीरज जैन की पत्नी, पूर्व मेयर घनश्याम गुर्जर की पुत्रवधु बीना गुर्जर मेयर पद के दावेदार माने जा रहे हैं। क्रॉस वोटिंग के डर से इस बार बीजेपी किसी नए चेहरे पर भी दांव खेल सकती है। वहीं कांग्रेस में वार्ड 36 से रिंकल गर्ग, वार्ड 39 से कमलेश शर्मा, वार्ड 23 से पिंकी रानी, वार्ड 34 से ममता सैनी सहित कई प्रत्याशी हैं। ये सभी महिलाएं मजबूत राजनीतिक बैकग्राउंड वाले परिवारों से आती हैं। ये जानिए किस वार्ड में कितने वोट पडे़ . सबसे अधिक वोट प्रतिशत वाले 5 वार्ड ( सबसे कम वोट प्रतिशत वाले 5 वार्ड अलवर में फर्जी वोट डालने पहुंची महिला को पकड़ा:64.60 प्रतिशत वोटिंग; निर्दलीय के समर्थकों का सिर फोड़ा, केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र ने शहर में पहला वोट डाला