अलवर में गुरुवार शाम से करीब 900 सफाईकर्मी हड़ताल पर चले गए हैं। एक्सपीरियंस सर्टिफिकेट(अनुभव प्रमाण पत्र) नहीं देने के विरोध में सफाईकर्मियों ने काम करना बंद कर दिया। निगम प्रशासन और सफाईकर्मियों के बीच हुई वार्ता बेनतीजा रही, जिसके बाद कर्मचारियों ने हड़ताल पर जाने का फैसला किया। गुरुवार शाम को सफाईकर्मी नगर निगम कार्यालय के परिसर में एकत्रित हुए। यहां महिला सफाईकर्मी मेयर की कार के आगे भी बैठ गई। सफाईकर्मियों ने रात को होने वाली सफाई बंद कर दी है। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि अनुभव प्रमाण पत्र नहीं मिलने तक सफाई नहीं होगी। उस दौरान उन्होंने नगर निगम प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। दरअसल, अनुभव प्रमाणपत्र की मांग को लेकर लंबे समय से भटक रहे कर्मचारियों की सुनवाई नहीं होने के बाद यह कदम उठाया गया है। सफाईकर्मियों के काम बंद करने से शहर में जगह-जगह कचरे के ढेर लगने और सफाई व्यवस्था पूरी तरह ठप होने की आशंका बन गई है। हड़ताल पर जाने से पहले कर्मचारियों की निगम प्रशासन और अधिकारियों के साथ वार्ता हुई, लेकिन कोई सहमति नहीं बनने के कारण बैठक बेनतीजा रही। इसके बाद कर्मचारियों ने स्पष्ट कर दिया कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होंगी, वे काम पर वापस नहीं लौटेंगे। रात के समय होने वाली विशेष सफाई का काम भी रोक दिया गया है। “निगम में हमारी सुनने वाला कोई नहीं” कर्मचारी नेता राजेश सारसर ने कहा कि अनुभव प्रमाणपत्र बनवाने के लिए चक्कर काटते हुए 1 महीना बीत चुका है, लेकिन अब तक एक भी प्रमाणपत्र जारी नहीं किया गया। निगम में हमारी पीड़ा सुनने वाला कोई नहीं है। हम मेयर, कमिश्नर और बनाई गई समिति से कई बार मिल चुके हैं, लेकिन कोई स्पष्ट जवाब देने को तैयार नहीं है। अगर अनुभव प्रमाणपत्र नहीं बना सकते, तो काम कर रहे सफाईकर्मियों को सीधे नियुक्ति पत्र जारी करें। कमेटी केवल कागजों में, धरातल पर शून्य काम सफाईकर्मी विनय कुमार ने बताया कि अनुभव प्रमाणपत्र तैयार करने के लिए नगर निगम कमिश्नर ने एक विशेष समिति का गठन किया था। हालांकि, समिति ने इस दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया। लगातार उपेक्षा से परेशान होकर कर्मचारियों को काम बंद करने जैसा सख्त फैसला लेना पड़ा। शहर के सामने खड़ी हो सकती है बड़ी चुनौती 900 कर्मचारियों के एक साथ हड़ताल पर जाने से अलवर शहर की सफाई व्यवस्था पूरी तरह चौपट होने की कगार पर है। अगर प्रशासन ने जल्द ही बीच का रास्ता निकालकर समझौता नहीं कराया, तो आने वाले दिनों में शहरवासियों को दुर्गंध और जगह-जगह कचरे के अंबार का सामना करना पड़ सकता है।