अलवर सरस के मशहूर कलाकंद की शेल्फ लाइफ बढ़ाने की तैयारी की जा रही है। इसके लिए 25 लाख रुपए की MAP मशीन लगाई गई है, जिसे करीब 15 दिन में चालू किया जाएगा। मशीन शुरू होने के बाद कलाकंद को करीब एक महीने तक सुरक्षित रखने में मदद मिलेगी। वहीं सचिवों की सहायता राशि में भी बढ़ोतरी की गई है। दरअसल, अलवर सरस डेयरी में पिछले एक साल के दौरान किसानों से जुड़ी व्यवस्थाओं से लेकर उत्पादन क्षमता और उत्पादों की पैकेजिंग तक कई अहम बदलाव किए गए हैं। अलवर डेयरी चेयरमैन नितिन सांगवान ने अपने एक वर्ष के कार्यकाल की उपलब्धियां बताते हुए कहा कि किसानों को समय पर भुगतान, डेयरी की क्षमता बढ़ाने और सरस के उत्पादों को बड़े बाजार तक पहुंचाने पर विशेष फोकस किया गया है। चेयरमैन ने कहा कि डेयरी की क्षमता बढ़ाने के लिए 3 लाख लीटर रोजाना क्षमता वाले नए प्लांट की स्थापना का काम शुरू हो चुका है। इसका भूमि पूजन अगस्त में केंद्रीय गृह मंत्री, मुख्यमंत्री और क्षेत्रीय सांसद की मौजूदगी में किया गया था। किसान परिवार की बेटी की शादी में ₹21 हजार का भात उन्होंने कहा कि डेयरी से जुड़े किसान परिवारों के सामाजिक सरोकारों को ध्यान में रखते हुए बेटी की शादी पर ₹21 हजार का ‘भात’ देने की पहल शुरू की गई है। इसके अलावा डेयरी सचिवों के लिए आकस्मिक परिस्थितियों में मिलने वाली सहायता राशि में भी बढ़ोतरी की गई है। सामान्य मृत्यु पर सहायता ₹1 लाख से बढ़ाकर ₹5 लाख, दुर्घटना में मृत्यु पर ₹2 लाख से बढ़ाकर ₹10 लाख और गंभीर बीमारी के इलाज के लिए सहायता ₹1 लाख से बढ़ाकर ₹2 लाख कर दी गई है। MAP तकनीक से 30 दिन तक टिकेगा कलाकंद अलवर के प्रसिद्ध कलाकंद को देशभर के बाजारों तक पहुंचाने के लिए डेयरी ने मॉडिफाइड एटमॉस्फेयर पैकेजिंग (MAP) तकनीक वाली आधुनिक मशीन लगाई है। पहले कलाकंद की शेल्फ लाइफ करीब 7 से 10 दिन थी। नई पैकेजिंग प्रक्रिया में पैकेट के अंदर की हवा निकालकर नाइट्रोजन गैस भरी जाती है और उसे एयरटाइट सील किया जाता है। चेयरमैन के अनुसार, लैब टेस्ट में इसकी शेल्फ लाइफ 30 दिन तक सामने आई है। इससे कलाकंद को लंबी दूरी के बाजारों में भेजने की संभावनाएं बढ़ी हैं। गांव-गांव बढ़ेगा दूध संग्रह नेटवर्क डेयरी ने ग्रामीण क्षेत्रों में दूध संग्रह व्यवस्था मजबूत करने के लिए नए प्री-डीसीएस और कलेक्शन सेंटर भी शुरू किए हैं। इसका उद्देश्य अधिक पशुपालकों को सरस के नेटवर्क से जोड़ना और गांवों से दूध की नियमित खरीद व्यवस्था को मजबूत करना है। चेयरमैन के अनुसार, आने वाले समय में डेयरी का फोकस किसानों को बेहतर भुगतान, उत्पादन क्षमता बढ़ाने, आधुनिक तकनीक अपनाने और सरस के उत्पादों को बड़े बाजार तक पहुंचाने पर रहेगा।