झुंझुनूं में बाल विवाह रोकने के लिए अब पुलिस के साथ शिक्षा और राजस्व विभाग के अधिकारी भी जिम्मेदारी निभाएंगे। सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के तहत ग्राम पंचायत से लेकर शहरी वार्ड तक बाल विवाह की रोकथाम के लिए नई व्यवस्था लागू की है। इसके तहत सरकारी स्कूलों के संस्थाप्रधानों, ग्राम विकास अधिकारियों और पटवारियों को बाल विवाह रोकने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। हालांकि, इस फैसले को लेकर शिक्षक संगठनों ने विरोध जताया है। उनका कहना है कि शिक्षा के अलावा दूसरे काम करने के कारण स्कूलों में पढ़ाई प्रभावित हो सकती है। माध्यमिक शिक्षा निदेशक ललित कुमार की ओर से जारी निर्देशों के अनुसार, ग्रामीण क्षेत्रों में सरकारी स्कूलों के संस्थाप्रधान संबंधित ग्राम पंचायत क्षेत्र में और शहरी क्षेत्रों में संबंधित नगरपालिका वार्ड के दायरे में जिम्मेदारी निभाएंगे। ग्राम विकास अधिकारी अपनी ग्राम पंचायत और पटवारी अपने पटवार मंडल क्षेत्र में बाल विवाह की रोकथाम से जुड़ी जिम्मेदारियां संभालेंगे। समय पर सूचना देना जरूरी बाल विवाह के मामलों में कई बार प्रशासन को शादी की तैयारियों के बारे में अंतिम चरण में पहुंचने के बाद सूचना मिलती है। ऐसे में स्थानीय स्तर पर मौजूद अधिकारियों की भूमिका महत्वपूर्ण मानी जा रही है। स्कूलों के संस्थाप्रधान विद्यार्थियों की उम्र, पढ़ाई छूटने की आशंका और कम उम्र में विवाह से जुड़ी जानकारी सामने आने पर संबंधित अधिकारियों को सूचना देने में काम कर सकते हैं। ग्राम विकास अधिकारी पंचायत स्तर पर समन्वय करेंगे, जबकि पटवारी अपने क्षेत्र से संबंधित सूचनाएं प्रशासन तक पहुंचाने का काम करेंगे। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद दी जा रही जिम्मेदारी सुप्रीम कोर्ट ने 18 अक्टूबर 2024 को सोसायटी फॉर एनलाइटनमेंट एंड वॉलंटरी एक्शन बनाम यूनियन ऑफ इंडिया मामले में बाल विवाह की रोकथाम को लेकर दिशा-निर्देश जारी किए थे। कोर्ट ने बाल विवाह प्रतिषेध अधिकारियों की भूमिका मजबूत करने, प्रशासनिक समन्वय बढ़ाने, जागरूकता फैलाने और प्रभावी रोकथाम पर जोर दिया था। स्थानीय स्तर पर जिम्मेदारी तय करने की व्यवस्था की गई है। प्रदेश सभाध्यक्ष बोले- पढ़ाई प्रभावित होने का डर वहीं, दूसरी तरफ नई जिम्मेदारी को लेकर शिक्षक संगठनों ने चिंता जताई है। प्राथमिक अध्यापक संघ के प्रदेश सभाध्यक्ष खेमराज मीणा का कहना है- शिक्षक विद्यार्थियों के हितों के लिए समर्पित हैं, लेकिन लगातार बढ़ते प्रशासनिक दायित्वों से शिक्षण व्यवस्था प्रभावित होने की आशंका है। बाल विवाह रोकना सामाजिक और कानूनी जिम्मेदारी है, लेकिन प्रधानाचार्यों और शिक्षकों पर जांच और कार्रवाई से जुड़े अतिरिक्त दायित्व डालने से उनका मूल काम प्रभावित हो सकता है। उन्होंने सरकार से फैसले पर पुनर्विचार करने की मांग की है। शिक्षक संगठनों का कहना है कि स्कूलों में पढ़ाई, विद्यार्थियों की उपस्थिति, परीक्षा, रिकॉर्ड संधारण और विभागीय योजनाओं से जुड़े काम पहले से ही होते हैं। ऐसे में नई जिम्मेदारी के साथ पर्याप्त प्रशिक्षण, स्पष्ट दिशा-निर्देश और प्रशासनिक सहयोग नहीं मिला तो व्यावहारिक दिक्कतें बढ़ सकती हैं।