बांसवाड़ा नगर परिषद द्वारा आयोजित होने वाले प्रसिद्ध दशहरा मेले की टेंडर प्रक्रिया के दौरान मंगलवार को जमकर बवाल हुआ। आगामी 11 अक्टूबर से नवरात्रि शुरू होने वाले हैं, ऐसे में समय कम होने के कारण मेले की व्यवस्थाओं को लेकर संशय और बढ़ गया है। मेले के ठेके के लिए कुल 9 ठेकेदारों ने आवेदन पत्र जमा किए थे। जांच के दौरान नगर परिषद प्रशासन ने 6 ठेकेदारों के आवेदनों को नियमों के तहत निरस्त कर दिया, जिससे केवल 3 ठेकेदार ही बोली की दौड़ में शेष रह गए। ​पात्र पाए गए 3 ठेकेदारों के बीच बोली की प्रक्रिया शुरू हुई और देखते ही देखते यह बोली 50 लाख 51 हजार रुपये तक पहुंच गई। इसी दौरान अपात्र घोषित किए गए 6 ठेकेदारों ने टेंडर प्रक्रिया में धांधली और पक्षपात का गंभीर आरोप लगाते हुए हंगामा शुरू कर दिया। विवाद इतना बढ़ गया कि अपात्र ठेकेदारों ने चल रही बोली प्रक्रिया को जबरन रोक दिया और परिसर से बोली लगा रहे तीनों ठेकेदारों को बाहर निकाल दिया। 11 अक्टूबर से नवरात्र शुरू हो जाएंगे, वहीं अब मेले को लेकर 3 दिन ही बचे हैं। इतने कम समय में मेले को लेकर व्यवस्थाएं करना व्यापारियों के लिए भी मुश्किल काम है। सफल बोलीदाता असफल बोलीदाता ​इस पूरे घटनाक्रम के दौरान नगर परिषद आयुक्त, अध्यक्ष (सभापति) और कई कर्मचारी मौके पर ही मौजूद थे, लेकिन स्थिति पूरी तरह अनियंत्रित हो गई। विरोध कर रहे ठेकेदारों और लोगों का कहना था कि समय का बहुत अभाव है, क्योंकि अब केवल कुछ ही दिन बचे हैं और मेले में दुकान लगाने, साफ-सफाई तथा अन्य व्यवस्थाओं के लिए पर्याप्त समय नहीं मिल पाएगा। ​मंगलवार रात्रि 1 बजे तक नगर परिषद कार्यालय में दशहरा मेले के इस हंगामे के बाद भी टेंडर पर कोई अंतिम मुहर नहीं लग सकी है। नगर परिषद के इस लचर घटनाक्रम और हंगामे के कारण स्थानीय व्यापारियों में भारी आक्रोश व्याप्त है। सभापति रावत बोले-आज कर टेंडर प्रक्रिया पूरी कर लेंगे सभापति मुकेश रावत ने बताया कि कल हंगामा हुआ था आज बोली के बाद टेंडर प्रकिया पूरी कर ली जाएगी।