बारां जिले के आदिवासी क्षेत्र के जंगल बचाने की लड़ाई तेज हो गई है। पर्यावरण कार्यकर्ता गब्बर यादव ने सोमवार को ग्राम टांडा अहिराणा के श्रीकृष्ण मंदिर में हवन-पूजन किया। उन्होंने अपना घर-परिवार और जूते-चप्पल त्यागने का संकल्प लिया और घोषणा की कि वे अपना जीवन जंगल की रक्षा में समर्पित करेंगे। यादव ने केंद्र सरकार के प्रस्तावित पंप स्टोरेज प्लांट को प्रकृति के खिलाफ बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकारी आंकड़ों के मुताबिक 1,19,000 पेड़ काटे जाएंगे, जबकि असल में 10 लाख से ज्यादा पेड़ खत्म होंगे। उन्होंने बताया कि जोधपुर हाईकोर्ट ने इस मामले में खुद संज्ञान लेकर पेड़ काटने पर रोक लगा रखी है। वन विभाग ने भी भूस्खलन के खतरे को लेकर आपत्ति जताई है। यह क्षेत्र कूनो नेशनल पार्क से सिर्फ 15 किलोमीटर दूर है, जहां चीते घूमते हैं। यादव ने जानकारी दी कि पिछले 22 महीनों से यह आंदोलन चल रहा है। इस दौरान दो बड़ी रैलियां भी निकाली जा चुकी हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि हाईकोर्ट के आदेश के बावजूद पेड़ काटे गए, तो चिपको आंदोलन की तरह लोग पेड़ों से चिपक जाएंगे। अगर परियोजना रद्द नहीं हुई, तो वे जयपुर जाकर मुख्यमंत्री आवास और विधानसभा का अनिश्चितकाल तक घेराव करेंगे। इस दौरान शिवपुरी से हनुमान मीणा और बारां से विकास सहित सैकड़ों ग्रामीण मौजूद थे।