बाड़मेर नगर परिषद के 55 वार्डों में इस बार कई दिग्गज नेताओं की साख दांव पर लगी है। विधायक, पूर्व विधायक और पूर्व जिलाध्यक्ष तक अपने-अपने प्रभाव वाले वार्डों में पार्टी प्रत्याशियों को जिताने के लिए जोर लगा रहे हैं। सभी नेता अपने वार्डों में जनसंपर्क कर रहे हैं। ऐसे में इन वार्डों के नतीजे सीधे तौर पर इन नेताओं की प्रतिष्ठा से भी जुड़े माने जा रहे हैं। विधायक के गृह वार्ड 16 में चौकोणीय मुकाबला बाड़मेर विधायक डॉ. प्रियंका चौधरी के गृह वार्ड 16 में मुकाबला दिलचस्प हो गया है। भाजपा ने पूर्व पार्षद उषा के पिता किशोर कुमार को प्रत्याशी बनाया है, जबकि कांग्रेस ने पदमाराम को मैदान में उतारा है। इससे पहले इनके परिवार से चुनाव हार चुके हैं। वहीं RLP से सुआ देवी और निर्दलीय शिवरतन भी चुनाव मैदान में हैं। वार्ड में टूटी सड़कें, पेयजल की किल्लत और सफाई व्यवस्था प्रमुख मुद्दे बने हुए हैं। वार्ड 34 में पूर्व जिलाध्यक्ष और पूर्व नेता प्रतिपक्ष की साख वार्ड 34 को भाजपा के पूर्व जिलाध्यक्ष दिलीप पालीवाल और पूर्व नेता प्रतिपक्ष पृथ्वीराज चांडक का प्रभाव वाला वार्ड माना जाता है। महिला सीट होने के कारण चांडक ने अपनी पत्नी अर्चना चांडक को भाजपा से प्रत्याशी बनाया है। कांग्रेस ने उर्मिला को टिकट दिया है। इस वार्ड में अब तक केवल एक बार कांग्रेस प्रत्याशी चुनाव जीता है। पूर्व विधायक मेवाराम जैन के सामने 2 सीटें निकालने की चुनौती पूर्व विधायक मेवाराम जैन का वोट वार्ड 54 में है, जबकि उनका निवास वार्ड 2 में है। ऐसे में इन दोनों वार्डों में पार्टी प्रत्याशियों को जिताना उनके लिए चुनौती है। वार्ड 54 में कांग्रेस ने युवा प्रत्याशी जिज्ञासा जैन को मैदान में उतारा है। भाजपा ने पूर्व पार्षद निर्मला को दोबारा मौका दिया है। वहीं निर्दलीय सायर कंवर और बहीदा रहमान भी चुनाव मैदान में हैं। वार्ड 48 में माली और पालीवाल की साख दांव पर वार्ड 48 में मुकाबला त्रिकोणीय हो गया है। यहां पूर्व यूथ कांग्रेस लोकसभा अध्यक्ष और PCC सदस्य ठाकराराम माली के साथ भाजपा के पूर्व जिलाध्यक्ष और वार्ड प्रभारी दिलीप पालीवाल की साख भी दांव पर है। माली ने अपने चचेरे भाई पारस परमार को कांग्रेस से टिकट दिलाया है, जबकि भाजपा ने खीमराज जांगिड़ को प्रत्याशी बनाया है। निर्दलीय मूलाराम चौधरी भी मैदान में हैं।