जयपुर में 11 सितंबर को नगर निगम के चुनाव होने हैं। पार्टी के सामने चुनौती केवल उम्मीदवारों का चयन नहीं, बल्कि टिकट नहीं मिलने के बाद पैदा होने वाले विरोध को संभालना भी है। भाजपा को आशंका है कि बड़ी संख्या में दावेदार टिकट नहीं मिलने पर निर्दलीय मैदान में उतर सकते हैं। संभावित बगावत को थामने के लिए भाजपा ने कई दावेदारों को अलग-अलग वार्डों में प्रभारी नियुक्त किया है। भाजपा ने जयपुर के 150 वार्ड प्रभारी नियुक्त किए हैं। इनमें 15 वर्तमान व पूर्व पार्षद हैं। दो ऐसे हैं जो पार्षद प्रत्याशी रह चुके हैं। एक साथ दो लक्ष्य साधे प्रभारियों को नियुक्त कर भाजपा एक साथ दो लक्ष्य साधने की कोशिश में है। पहला, चुनावी तैयारियों को वार्ड स्तर पर मजबूत करना और दूसरा, टिकट के दावेदारों के बीच संभावित असंतोष को नियंत्रित करना। असली परीक्षा टिकट वितरण के बाद होगी। वार्ड प्रभारी ने अगर कहीं दावेदारी की है। पार्टी को अगर उसकी दावेदारी मजबूत लगती है तो टिकट पर विचार करेगी। वार्ड प्रभारी बनने से दावेदारी खत्म नहीं होती। -अमित गोयल, शहर अध्यक्ष, भाजपा