आश्विन कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी पर तृतीय पीठ प्रन्यास के द्वारकाधीश मंदिर में तृतीय पुत्र बालकृष्णलालजी महाराज का उत्सव धूमधाम से मनाया गया। सुबह 6.30 बजे मंगला के दर्शन खुले, जो करीब आधे घंटे चले। इसके बाद 9.30 बजे शृंगार दर्शन में प्रभु को बड़ी केसरी कुल्हे पर 11 चंद्रिकाएं जोड़कर केसरी चाकदार खुले-बंद का वागा धारण कराया गया। केसरी सूथन, लाल पटका और हीरे-पन्ना-माणिक के विशेष आभूषणों से शृंगार किया गया। निज मंदिर में पादुका का केसर से स्नान कराया गया। बैंड परेड ने दी सलामी, राजभोग में उमड़ी भीड़ : द्वारकेश बैंड और मंदिर सुरक्षा बटालियन ने विट्ठलविलास बाग से परेड निकाली। मंदिर मार्ग होते हुए गोवर्धन चौक पहुंची परेड में प्रभु द्वारकाधीश को सलामी दी गई। मंदिर सुरक्षा प्रभारी भगवतीलाल पालीवाल के नेतृत्व में हुई परेड के बाद राजभोग दर्शन खुले। इसमें स्थानीय श्रद्धालुओं के साथ बाहर से आए वैष्णवों की भी बड़ी संख्या रही। संजीव कुमार महाराज ने राजभोग आरती की। मंदिर पंडित केशव सांचीहर और बिंदुलाल शर्मा ने बालकृष्णलालजी का जन्म वर्ष फल पढ़कर सुनाया और मंगल बधाई के पद गाए। मंदिर मुखिया ने महाराज का प्रसादी कंकू से तिलक किया। बधाई पदों से भक्तिमय हुआ वातावरण : कमल चौक में नगाड़े बजाए गए। शाम 5 बजे उत्थापन दर्शन में मंदिर परिसर बधाई पदों से गूंज उठा। शयन दर्शन में मुख्य कीर्तनकारों ने सांझी के पदों का गायन किया। इसके बाद संजीव कुमार महाराज ने शयन दर्शन की आरती संपन्न कराई।