चित्तौड़गढ़ नगर परिषद के 60 वार्डों के लिए जमा हुए नामांकन फॉर्म की आज मंगलवार को स्क्रूटनी की गई। इस दौरान बीजेपी, कांग्रेस के पदाधिकारियों और रिटर्निंग ऑफिसर (RO) के बीच जमकर हंगामा हो गया। कांग्रेस के पदाधिकारियों और साथ आए वकीलों ने एडीएम रावतभाटा राजलक्ष्मी गहलोत पर भेदभाव करने का आरोप लगाया। आरोप लगाया कि RO बार-बार उठकर बाहर जा रही थीं, जिससे मामला संदिग्ध हो गया। पढ़िए क्यों हुआ हंगामा पूर्व विधायक से ADM बोलीं- हद पार मत कीजिए RO राजलक्ष्मी गहलोत ने आपत्ति खारिज करते हुए नामांकन फॉर्म को स्वीकृत कर दिया। इसके बाद कांग्रेस के पदाधिकारियों ने हंगामा किया। इस पर एडीएम ने नाराजगी जताते हुए कहा कि आरोप लगाने का किसी को अधिकार नहीं है और अपने शब्दों पर लगाम रखें। इस दौरान पूर्व कांग्रेस विधायक सुरेंद्र सिंह जाड़ावत ने एडीएम से कहा- आपको अपनी नौकरी लंबी चलानी है। इस पर एडीएम ने जवाब दिया- आप मेरी नौकरी नहीं चैलेंज कर सकते और आप अपनी हद पार मत कीजिए। पूर्व विधायक ने कहा कि तब तो आप बीजेपी को पूरा 60 के 60 वार्ड जिता कर दे दो तो उसे पर एडीएम ने कहा कि आप अपनी लिमिट क्रॉस कर रहे हैं जाड़ावत साहब… बार-बार उठकर जाना भी संदिग्ध है: जाड़ावत पूर्व विधायक सुरेंद्र सिंह जाड़ावत ने कहा कि मुख्यमंत्री अशोक गहलोत भी आरोप लगा रहे हैं कि पूरा प्रशासन भाजपा के दबाव में आकर काम कर रहा है। निकाय चुनाव हमेशा निष्पक्ष होने चाहिए। जो पिंटू मीणा पर लगे आरोप हैं, उन्हें उसने छुपाया या नहीं छुपाया, इससे कोई मतलब नहीं है। लेकिन उसके खिलाफ 7 साल की सजा के प्रावधान वाली धाराओं में चार्जशीट दाखिल हो चुकी है और मामला अभी भी विचाराधीन है। अगर ऐसा कोई अपराध है, जिसमें उसे 7 साल की सजा हो सकती है, तो उसका फॉर्म निरस्त करने योग्य है। नगर पालिका एक्ट में इसका प्रावधान है। लेकिन RO, जो एक RAS अधिकारी हैं, उन्होंने बहुत गलत निर्णय लिया है। वह संविधान और कानून को भी नहीं मान रही हैं। इसके अलावा यह अधिकारी बार-बार बाहर जा रही हैं। जिस काम को तुरंत करना चाहिए था, उसके लिए उन्होंने ढाई घंटे लगा दिए। ऐसे लगता है कि प्रशासन बीजेपी को 60 वार्ड जिताना चाहता है। यह बहुत दुर्भाग्यपूर्ण बात है। हम मांग करते हैं कि इन्हें हटाकर किसी निष्पक्ष अधिकारी को यह जिम्मेदारी दी जाए। जिला निर्वाचन अधिकारी रिव्यू कर सकते हैं वकील अभिषेक गर्ग ने बताया कि राजस्थान नगर पालिका अधिनियम, 2009 की धारा 24(3) के तहत नगर पालिका चुनाव में प्रत्याशी चुने जाने के प्रावधान स्पष्ट हैं। इसमें साफ लिखा है कि यदि किसी व्यक्ति पर ऐसा आरोप है, जिसमें उसे पांच वर्ष या उससे अधिक की सजा हो सकती है और मामला न्यायालय में विचाराधीन है, तो ऐसा व्यक्ति चुनाव नहीं लड़ सकता। उन्होंने कहा कि मामले को लेकर सभी प्रमाणित (सर्टिफाइड) दस्तावेज जमा किए गए थे। धारा 365 का आरोप होने के बावजूद आवेदन को निरस्त नहीं किया गया, जबकि उनकी आपत्ति को खारिज कर दिया गया। उन्होंने कहा कि फिलहाल चुनाव प्रक्रिया चल रही है, इसलिए चुनाव नहीं रोका जाएगा। हालांकि, जिला निर्वाचन अधिकारी इस मामले में संज्ञान लेकर रिव्यू कर सकते हैं, लेकिन जो हालात नजर आ रहे हैं, उनसे ऐसा नहीं लगता कि ऐसा कुछ होगा। भाजपा के पदाधिकारी पलटे इससे पहले जब RO ने बीजेपी के पदाधिकारी से पूछा कि क्या आपको कोई जवाब देना है, तो भाजपा पदाधिकारी ने मना करते हुए कहा कि सारे डॉक्यूमेंट सामने हैं और अगर सच है तो इस पर हम क्या बोलें। लेकिन जब कांग्रेस के पदाधिकारियों ने उन्हें टोकते हुए कहा कि हमारे आरोप को इन्होंने स्वीकार कर लिया है, तो इस पर बीजेपी के पदाधिकारी ने साफ इनकार कर दिया। उन्होंने कहा कि हमने ऐसा कुछ भी स्वीकार नहीं किया है। 360 टोटल फॉर्म हुए थे दाखिल इस दौरान 360 फॉर्म में से कुछ फॉर्म स्वीकृत किए गए। दोनों पार्टियों की ओर से 11 जनों के खिलाफ लिखित रूप से आपत्तियां पेश की गईं, जबकि एक जने के खिलाफ मौखिक आपत्ति आई थी। इनमें से दो आपत्तियों को स्वीकार करते हुए संबंधित फॉर्म रिजेक्ट कर दिए गए। वहीं बाकी सभी आपत्तियों को खारिज कर दिया गया। इसके अलावा मौखिक आपत्ति को भी मान्य नहीं माना गया। अतिरिक्त जिला कलेक्टर रावतभाटा राजलक्ष्मी गहलोत ने आज सभी फॉर्म की समीक्षा की। कई प्रत्याशियों ने नामांकन दाखिल किया था। दोनों पार्टियों की ओर से जारी किए गए प्रत्याशियों के नाम के बाद उनके फॉर्म भी स्वीकार किए गए। सुरेश झंवर की चिंता हुई खत्म इसके अलावा सबसे ज्यादा चर्चा वार्ड नंबर 17 को लेकर भी हुई। इसमें कांग्रेस प्रत्याशी महेंद्र सिंह मेड़तिया ने बीजेपी के वरिष्ठ कार्यकर्ता और प्रत्याशी सुरेश चंद्र झंवर पर आरोप लगाते हुए कहा कि उन्होंने अपनी उम्र और अन्य तथ्यों को लेकर गलत डॉक्यूमेंट दिए हैं। इस पर एडीएम राजलक्ष्मी गहलोत ने यह कहते हुए आपत्ति खारिज कर दी कि प्रत्याशी की आयु 21 साल से अधिक होना जरूरी है। इसके अलावा अन्य कोई डॉक्यूमेंट मायने नहीं रखता। रही बात पुलिस वेरिफिकेशन से जुड़े डॉक्यूमेंट की, तो इसकी जरूरत नहीं होती है। सिर्फ शपथ पत्र जरूरी है। आपत्ति में कहीं भी पुलिस वेरिफिकेशन का स्पष्ट उल्लेख नहीं है, सिर्फ मौखिक आपत्ति की गई है, इसलिए इसे भी खारिज कर दिया गया। नहीं चुनाव लड़ सकते अभिषेक व्यास वार्ड नंबर 25 में भी भाजपा प्रत्याशी शैलेंद्र झंवर ने निर्दलीय प्रत्याशी अभिषेक व्यास और महेश कुमार के खिलाफ आपत्ति पत्र पेश करते हुए कहा कि दोनों के प्रस्तावक एक ही हैं। इस पर जांच करने के बाद रिटर्निंग ऑफिसर ने बताया कि जांच में दोनों के पांच प्रस्तावकों में से तीन प्रस्तावक एक ही पाए गए। इसलिए उनके फॉर्म खारिज कर दिए गए, जिसके कारण अब अभिषेक व्यास और महेश कुमार चुनाव नहीं लड़ सकेंगे।