चूरू शहर के गायत्री शक्तिपीठ मंदिर में सर्व पितृ अमावस्या पर शनिवार सुबह 9 बजे सर्व समाज का सामूहिक तर्पण-पिंडदान कार्यक्रम हुआ। इसमें 30 परिवारों ने अपने पूर्वजों को याद कर उनकी शांति के लिए विधि-विधान से तर्पण और पिंडदान किया। कार्यक्रम में पुरुषों के साथ महिलाओं ने भी भाग लिया और मंत्रोच्चार के बीच पितरों को जल अर्पित किया। मंत्रोच्चार के साथ करवाया तर्पण पितृ तर्पण का कार्यक्रम गायत्री संस्कार केंद्र हरजी से आए प्रवीण गहलोत और मीठालाल सुथार ने करवाया। प्रवीण गहलोत ने शास्त्रों के अनुसार मंत्रों के साथ तर्पण की विधि संपन्न करवाई। इस दौरान श्रद्धालुओं ने ‘ओम पितृभ्यः स्वधा’ मंत्र का उच्चारण करते हुए पितरों को जल अर्पित किया। कार्यक्रम में देव तर्पण, ऋषि तर्पण, पितृ तर्पण और भीष्म तर्पण के साथ यम तर्पण भी करवाया गया। इसके अलावा महापुरुषों और शहीद सैनिकों को याद करते हुए उनका सामूहिक तर्पण किया गया। ‘तर्पण का अर्थ है तृप्त करना’ प्रवीण गहलोत ने श्रद्धालुओं को पितृ पक्ष और तर्पण-पिंडदान से जुड़ी परंपराओं की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि तर्पण का अर्थ तृप्त करना है, जिसे भावना और श्रद्धा के साथ अर्पित किया जाता है। इस परंपरा के माध्यम से लोग अपने पूर्वजों को स्मरण कर उनके प्रति सम्मान प्रकट करते हैं। पूर्वजों के प्रति कृतज्ञता जताने की परंपरा गायत्री शक्तिपीठ की मुख्य प्रबंध ट्रस्टी रंजन देवी ने बताया कि भारतीय संस्कृति में श्राद्ध और तर्पण पूर्वजों के प्रति सम्मान और आभार व्यक्त करने का माध्यम है। यह परंपरा माता-पिता और पूर्वजों के प्रति कृतज्ञता जताने तथा उनकी आत्मा की शांति के लिए श्रद्धापूर्वक निभाई जाती है।