नगर निगम चुनाव को लेकर सियासी पारा लगातार चढ़ता जा रहा है। शुक्रवार को घटनाक्रम तेजी से बदले। जहां एक तरफ मेयर पद के समीकरण साफ होते नजर आए वहीं दूसरी तरफ प्रशासनिक मशीनरी के कथित दुरुपयोग को लेकर कांग्रेस के दिग्गज नेताओं ने तीखे तेवर दिखाए हैं। वार्ड 50 के पार्षद नवरतन डागा द्वारा दो दिन पहले परिवारवाद के खिलाफ आवाज उठाकर नामांकन दाखिल करना और ठीक दो दिन बाद शुक्रवार को अचानक नाम वापस ले लेना शहर में चर्चा का मुख्य विषय बन गया है। दिलचस्प बात यह है कि डागा के परिवारवाद के आरोप की हूबहू कॉपी भाजपा के सुरेन्द्र सिंह शेखावत ने भी नामांकन के वक्त उठाई थी। हालांकि दो दिन में परिवारवाद तो खत्म नहीं हुआ लेकिन डागा के मैदान से हटने के बाद आमजन में यह सवाल उठ रहा है कि आखिर फिर नामांकन हुआ क्यों और हुआ तो उठा क्यों। पार्टी के खिलाफ नहीं जाएंगे: डागा - पर्चा उठाने के बाद डागा ने सफाई दी कि आलाकमान से बात हो गई है और वे कांग्रेस के खिलाफ नहीं जाएंगे। हालांकिि राजनीतिक हलकों में उनकी और सुरेन्द्र सिंह शेखावत के रिश्तों को लेकर कयासों का दौर जारी है। इस पूरे घटनाक्रम के बीच डागा ‘सुर्खियां बटोरने’ में पूरी तरह कामयाब रहे। उनके हटने के बाद अब मेयर पद के मुकाबले में केवल दो ही उम्मीदवार मैदान में बचे हैं, जिसमें कांग्रेस से अनिल कल्ला और भाजपा से सुरेन्द्र सिंह शेखावत के बीच 21 तारीख को सीधा मुकाबला होगा। 55 साल के राजनीतिक सफर में ऐसा प्रशासनिक रूप कभी नहीं देखाः डॉ. कल्ला - चुनावी सरगर्मी के बीच वार्ड 35 के कांग्रेस पार्षद मनोज बिश्नोई के होटल को बीकानेर विकास प्राधिकरण (बीडीए) की ओर से नोटिस दिए जाने का मामला गरमा गया है। इस कार्रवाई के बाद पूर्व मंत्री डॉ. बी.डी. कल्ला ने पुलिस और जिला प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए हैं। कलेक्ट्रेट पहुंचकर जिला निर्वाचन अधिकारी को ज्ञापन सौंपने वाले डॉ. कल्ला ने मीडिया से बातचीत में तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने आरोप लगाया कि जहां कांग्रेस के पार्षद ठहरे हैं वहां सीआईडी के अधिकारी पहुंच रहे हैं। उनके घरों पर पुलिस जा रही है और परिजनों को धमकाया जा रहा है। यह सब पुलिस के अधिकारियों के इशारे पर हो रहा है। अपने 55 साल के राजनीतिक सफर का हवाला देते हुए डॉ. कल्ला ने कहा कि उन्होंने अपने जीवन में पुलिस और प्रशासन का ऐसा रूप कभी नहीं देखा। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि उनकी भी सरकार रही है और वे मंत्री रहे हैं। लेकिन उन्होंने कभी सरकारी मशीनरी का ऐसा दुरुपयोग नहीं होने दिया। उन्होंने अधिकारियों को चेतावनी देते हुए कहा कि वे यह भूल गए हैं कि सरकारें बदलती रहती हैं। पीसीसी से लेकर राष्ट्रीय स्तर तक ऐसे अधिकारियों के नाम नोट किए जा रहे हैं और अधिकारी अपनी बारी के लिए तैयार रहें। उल्लेखनीय है कि डॉ. कल्ला से पहले प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद डोटासरा भी इसी तरह के आरोप लगा चुके हैं। इन तमाम घटनाक्रमों को देखते हुए अब ऐसा प्रतीत हो रहा है कि चुनाव में कांग्रेस का मुकाबला सीधे तौर पर भाजपा से कम और पुलिस-प्रशासन से ज्यादा नजर आ रहा है।