राजस्थान में नगरीय निकाय चुनावों की हलचल के साथ प्रचार का तरीका भी बदल गया है। कभी लाउडस्पीकर, ऑटो-रिक्शा पर बैनर, दीवारों पर नारे और गली-मोहल्लों में जनसंपर्क प्रचार की पहचान थे। अब चुनावी प्रचार का बड़ा मैदान मतदाताओं की मोबाइल स्क्रीन बन गई है। चुनाव लड़ने के इच्छुक प्रत्याशी जनसंपर्क के साथ सोशल मीडिया पर भी सक्रिय हैं। जनसभाओं के लाइव प्रसारण, नुक्कड़ सभा के वीडियो और रील के जरिए हजारों मतदाताओं तक पहुंच बना रहे हैं। वार्ड, कॉलोनी और आवासीय सोसायटियों के अलग-अलग वाट्सएप ग्रुप बना वोटर्स से सीधा संवाद कर रहे हैं। वर्चुअल बैठकें भी प्रचार का नया माध्यम बन रही हैं। डेटा एनालिसिस और नई तकनीकी का उपयोग: चुनावी रणनीति में डेटा एनालिसिस और नई तकनीक का उपयोग भी बढ़ा है। स्थानीय चुनाव में व्यक्तिगत छवि और जमीनी पकड़ अब भी निर्णायक है। इसलिए जीत का नया मंत्र यही है.... गलियों में मजबूत जनसंपर्क और मोबाइल स्क्रीन पर प्रभावी मौजूदगी।