2 साल तक मिलता है लाभ, हर माह करीब 60 करोड़ रुपए सरकार वहन करती है प्रदेश के करीब 2 लाख बेरोजगार 7 महीनों से भत्ते के लिए तरस रहे हैं। भत्ता नहीं मिलने से बेरोजगार युवाओं को आर्थिक संबल नहीं मिल पा रहा है। मुख्यमंत्री युवा संबल योजना के तहत मिलने वाले इस भत्ते के लिए रोजगार निदेशालय ने बिल तैयार करके वित्त विभाग में भिजवा रखे है लेकिन समय पर भत्ता नहीं मिल रहा है। आधे राजस्थान को मार्च तक ईसीएस हो गया है जबकि नागौर, कुचामन-डीडवाना सहित कई जिले ऐसे हैं जहां पर सात महीने से भत्ता नहीं मिला है। ऐसे में बेरोजगारों को आर्थिक रूप से परेशान होना पड़ रहा है। गौरतलब है कि प्रदेश सरकार हर महीने पूरे राजथान में अधिकतम 2 लाख बेरोजगारों को भत्ता देती है। इस पर करीब 60 करोड़ रुपए खर्च होते हैं। पिछले कई महीने से भत्ता नहीं मिलने से प्रदेश के बेरोजगारों के जिलावार करोड़ों रुपए फंसे हुए हैं, जिससे उन्हें परेशानी उठानी पड़ रही है। 4000 रु. हर माह भत्ता मिलता है मुख्यमंत्री युवा संबल योजना में बेरोजगार युवाओं को 4,000 रुपए, ट्रांसजेंडर, महिला और दिव्यांगों को 4,500 रुपए प्रति माह भत्ता दिए जाने का प्रावधान है। योजना में अधिकतम 2 लाख युवाओं को सरकार की ओर से लाभ दिया जाता है। हालांकि हर महीने कभी 1.80 लाख तो कभी 1.90 लाख युवा ही भत्ते के लिए पात्र घोषित होते हैं। एक बेरोजगार को भत्ता अधिकतम दो साल या उसको रोजगार मिलने तक ही दिया जा सकता है। प्रदेश के इन 17 जिलों में मार्च महीने तक की ही राशि पहुंची अजमेर, बारां, भरतपुर, भीलवाड़ा, बीकानेर श्रीगंगानगर, हनुमानगढ़, झालावाड़ा, कोटा पाली, सवाई माधोपुर, टोंक, उदयपुर, बाड़मेर, जैसलमेर-फलोदी और सलूंबर में मार्च तक की ही राशि पहुंची है। 10 लाख युवाओं को दायरे में लाया जाए कुछ जिलों में सात महीने से तो कुछ जिलों में पांच महीने से भत्ता नहीं मिल सका है। हमारी मांग है कि बेरोजगारी भत्ता जल्द दिलाया जाए । साथ ही दो लाख बेरोजगार इसमें शामिल हैं, इसे बढ़ाकर कम से कम 10 लाख तक किया जाए। प्रदेश में बेरोजगारों का आंकड़ा 40 लाख है।-राधे मीणा, अध्यक्ष, राजस्थान युवा बेरोजगार महासंघ