विश्व पर्यटन दिवस पर उपमुख्यमंत्री और पर्यटन मंत्री दीया कुमारी ने कहा- अगर मैं राजनेता नहीं होती तो अब मेरा दूसरा करियर ट्रैवल ब्लॉगर बनने का होता। उन्होंने कहा कि बचपन में मैं एस्ट्रोनॉट बनना चाहती थी। इसके बाद मैंने वकील बनने का सपना देखा। वहीं अब सोशल मीडिया पर ट्रैवल ब्लॉगिंग और कंटेंट क्रिएशन मुझे काफी आकर्षित करता है। टूरिज्म डिपार्टमेंट की ओर से रविवार को राजस्थान इंटरनेशनल सेंटर में राजस्थान क्रिएटर्स कॉन्क्लेव-2026 का आयोजन किया गया। इसमें मुख्य अतिथि दीया कुमारी ने यह कहा। कॉन्क्लेव में देशभर के 100 से अधिक ट्रैवल ब्लॉगर, सोशल मीडिया कंटेंट क्रिएटर, स्कूल-कॉलेज के युवा और होटल इंडस्ट्री से जुड़े स्टेकहोल्डर्स शामिल हुए। कार्यक्रम में राजस्थान के पर्यटन को नए दौर के यात्रियों की पसंद और सोशल मीडिया के बदलते ट्रेंड के अनुरूप डवलप करने पर चर्चा हुई। प्रमुख ट्रैवल इन्फ्लुएंसर्स शशांक संघवी, प्रकृति अरोरा और आशीष शर्मा के साथ मंच पर चर्चा करते हुए दीया कुमारी ने अपनी बात रखी। ‘मैं भी आपका जॉब लेना चाहती हूं’ दीया कुमारी ने कंटेंट क्रिएटर्स से कहा- मैं ट्रैवल ब्लॉगर्स के काम से काफी प्रभावित हूं। अब मैं आपका जॉब लेना चाहती हूं। उन्होंने कहा- ट्रैवल ब्लॉगर्स जिस तरह किसी जगह, संस्कृति, खानपान और अनुभव को सोशल मीडिया पर प्रस्तुत करते हैं, वह काफी दिलचस्प है। कई बार मुझे भी लगता कि ये लोग किस तरह कंटेंट तैयार करते हैं और किसी जगह को इतनी रोचकता से कैसे दिखाते हैं। दीया कुमारी ने कहा- राजस्थान की सबसे बड़ी खूबी इसकी विविधता है। यहां अलग-अलग तरह के पर्यटन अनुभव एक ही राज्य में मिल जाते हैं। जयपुर की विरासत, आमेर, हवा महल और जंतर-मंतर से लेकर जोधपुर का मेहरानगढ़ और ब्लू सिटी, बीकानेर की अलग स्थापत्य शैली-खानपान, जैसलमेर के सैंड ड्यून्स-गोल्डन फोर्ट, उदयपुर की झीलें-महल और सवाई माधोपुर के टाइगर रिजर्व पर्यटकों को अलग-अलग अनुभव देते हैं। उन्होंने जयपुर के परकोटा क्षेत्र को भी खास बताते हुए कहा- यहां की छोटी-छोटी गलियां और अलग-अलग व्यवसायों के पारंपरिक बाजार शहर को विशिष्ट बनाते हैं। एक गली में किसी खास तरह के उत्पाद मिलना और दूसरी गली में किसी दूसरे कारोबार का केंद्र होना जयपुर की अलग पहचान है। यहां देखिए इवेंट के फोटोज… ‘अब पर्यटक सिर्फ स्मारक देखकर वापस नहीं जाना चाहते’ दीया कुमारी ने कहा- पर्यटन की परिभाषा तेजी से बदल रही है। अब पर्यटक केवल किसी स्मारक पर जाकर फोटो खिंचवाने और उसके बारे में जानकारी लेने सीमित नहीं रहना चाहते, बल्कि वे अनुभव करना चाहते हैं। उन्होंने कहा- ग्रामीण पर्यटन और होमस्टे इसका उदाहरण हैं। पर्यटक अब यह जानना चाहते हैं कि स्थानीय लोग कैसे रहते हैं। क्या खाते हैं। उनकी भाषा, संस्कृति और रहन-सहन कैसा है। इसी तरह वे स्थानीय त्योहारों का हिस्सा बनना और वहां की संस्कृति को करीब से अनुभव करना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि स्मारक और संग्रहालय आज भी पर्यटन का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं, लेकिन इनके साथ नए अनुभव जोड़ना भी जरूरी है। ‘सरकार अकेले पर्यटन को आगे नहीं बढ़ा सकती’ पर्यटन मंत्री ने कहा- सरकार नीति बना सकती है। आधारभूत ढांचा विकसित कर सकती है। कनेक्टिविटी और सुरक्षा बेहतर कर सकती है, लेकिन पर्यटन में रचनात्मकता और नए अनुभव विकसित करने के लिए निजी क्षेत्र और स्थानीय लोगों की भागीदारी जरूरी है। उन्होंने राजस्थान की पर्यटन नीति-2024 का उल्लेख करते हुए कहा कि कॉन्सर्ट और आयोजनों को प्रोत्साहित करने के लिए भी सरकार की ओर से कई तरह के प्रोत्साहन दिए जा रहे हैं। जयपुर में हुए आईफा अवॉर्ड्स का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि सरकार और निजी संस्थाओं के सहयोग से बड़े आयोजन संभव हुए। ‘नए पर्यटन स्थलों को सामने लाना जरूरी’ दीया कुमारी ने कहा- राजस्थान में कई ऐसे पर्यटन स्थल हैं, जिनके बारे में अभी पर्यटकों को पर्याप्त जानकारी नहीं है। ऐसे जगह का प्रचार-प्रसार करने की जरूरत है। इससे नए क्षेत्रों में पर्यटकों की आवाजाही बढ़ेगी और स्थानीय स्तर पर रोजगार तथा अर्थव्यवस्था को भी फायदा मिलेगा। उन्होंने नाइट टूरिज्म के साथ-साथ दिन और रात दोनों समय के पर्यटन को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा- पर्यटन के नए अनुभव विकसित करने के लिए स्थानीय लोगों को भी साथ लेकर चलना होगा। इन्फ्लुएंसर्स से पूछा- ‘कौन सी रील चलती है, कौन सी नहीं?’ दीया कुमारी ने कहा- ट्रैवल कंटेंट क्रिएटर्स को पता होता है कि दर्शकों को क्या पसंद आ रहा है। किस तरह की रील आगे बढ़ रही है और किस तरह की सामग्री पर लोगों की प्रतिक्रिया कम मिल रही है। इसी अनुभव का उपयोग राजस्थान के पर्यटन प्रचार में करने के लिए क्रिएटर्स के साथ संवाद किया गया। उन्होंने कहा कि स्कूल और कॉलेज के युवाओं को भी इस तरह के संवाद में शामिल किया गया, ताकि नई पीढ़ी की पसंद और पर्यटन से जुड़ी उनकी अपेक्षाओं को समझा जा सके। शेखावाटी पर भी फोकस दीया कुमारी ने कहा- शेखावाटी के लिए भी नई पर्यटन नीति लाई जा रही है। उन्होंने कहा- वहां पर्यटन विकसित करते समय स्थानीय लोगों को साथ लेकर चलना जरूरी होगा। कला-संस्कृति की हस्तियों को किया सम्मानित कॉन्क्लेव-2026’ में पर्यटन, कला एवं संस्कृति के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाली विभूतियों को सम्मानित किया गया। जयपुर के प्रसिद्ध चित्रकार और कलाविद रामू रामदेव को कला और संस्कृति के क्षेत्र में सर्वश्रेष्ठ योगदान के लिए सम्मान मिला। देवांग अग्रवाल को नवीन पर्यटन स्थलों के विकास में उत्कृष्ट योगदान के लिए सम्मानित किया गया। वहीं राजस्थान पर्यटन को वैश्विक स्तर पर बढ़ावा देने में उल्लेखनीय भूमिका के लिए कुलदीप चंदेला को सम्मान दिया गया। अपरंपरागत पर्यटन अनुभवों के क्षेत्र में विशेष पहचान बनाने वाले अभिमन्यु सिंह को सम्मानित किया गया। इसके अलावा सामाजिक पर्यटन और ग्राम पर्यटन के विकास में योगदान के लिए श्याम सुंदर पालीवाल को सम्मानित किया गया। लाखों फॉलोअर्स वाले ट्रैवल क्रिएटर्स पहुंचे कॉन्क्लेव में देश के प्रमुख ट्रैवल इन्फ्लुएंसर्स और कंटेंट क्रिएटर्स भी शामिल हुए। इनमें शशांक संघवी के करीब 33 लाख फॉलोअर्स हैं। प्रकृति अरोड़ा, आशीष शर्मा के करीब 7 लाख फॉलोअर्स, अंकुश शर्मा और श्रेष्ठा शर्मा के करीब 10 लाख फॉलोअर्स हैं। इसके अलावा कृतिका गोयल के करीब 7 लाख सब्सक्राइबर और 1.80 लाख फॉलोअर्स है। वहीं लक्ष्मी शरत, जो हेरिटेज टूरिज्म पर राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त क्रिएटर हैं, उन्होंने भी कार्यक्रम में हिस्सा लिया।