जोधपुर के बासनी स्थित सर हैंडीक्राफ्ट फैक्ट्री में आग बुझाने के दौरान केमिकल ड्रम में हुए जोरदार धमाके में गंभीर रूप से झुलसे डूंगरपुर के फायरकर्मी प्रीतेश परमार की शनिवार सुबह इलाज के दौरान मौत हो गई। प्रीतेश करीब 90 प्रतिशत तक झुलस गए थे और पिछले दो दिन से वेंटिलेटर पर जिंदगी और मौत से जूझ रहे थे। उनके निधन की सूचना मिलते ही डूंगरपुर के उनके गांव सहित अग्निशमन विभाग में शोक की लहर दौड़ गई। आग बुझाने पहुंची टीम, पत्थर गिरने के बाद हुआ धमाका प्रीतेश जोधपुर फायर ब्रिगेड में कार्यरत थे। फैक्ट्री में आग लगने की सूचना पर फायर ब्रिगेड की टीम आग बुझाने पहुंची थी। इसी दौरान एक पत्थर गिरने से केमिकल ड्रम में जोरदार धमाका हो गया। विस्फोट इतना तेज था कि इसकी चपेट में आकर 14 फायर ब्रिगेड कर्मचारी झुलस गए। इनमें प्रीतेश की हालत सबसे गंभीर थी। चार कर्मचारी ऑक्सीजन सपोर्ट पर, दो अभी वेंटिलेटर पर महात्मा गांधी अस्पताल के अधीक्षक डॉ. फतेह सिंह भाटी ने बताया कि प्रीतेश करीब 90 प्रतिशत तक झुलसे थे। हादसे में घायल सुरेंद्र और प्रदीप अभी वेंटिलेटर पर हैं। सुरेंद्र 60-65 प्रतिशत और प्रदीप 80-90 प्रतिशत तक झुलसे हैं। वहीं प्रवीण, कुणाल, दुर्गेश और विनय ऑक्सीजन सपोर्ट पर हैं। पिता भी फायर ब्रिगेड में, बेटे ने कर्तव्य निभाते हुए गंवाई जान प्रीतेश परमार के पिता धुलेश्वर परमार भी डूंगरपुर नगर परिषद की फायर ब्रिगेड टीम में लीडिंग फायरमैन हैं। आग बुझाने के दौरान कर्तव्य निभाते हुए प्रीतेश ने अपनी जान गंवा दी। उनके निधन से परिवार के साथ-साथ अग्निशमन विभाग के कर्मचारियों और परिचितों में भी शोक का माहौल है। रविवार सुबह 7 बजे गांव में अंतिम संस्कार प्रीतेश परमार की अंत्येष्टि रविवार सुबह 7 बजे उनके मूल गांव लांबाभाटड़ा, चुंडावाड़ा में की जाएगी। अंतिम यात्रा में ग्रामीणों, परिजनों और अग्निशमन विभाग के कर्मचारियों के शामिल होने की संभावना है। कर्तव्य की राह पर जान गंवाने वाले प्रीतेश को विभाग और क्षेत्रवासियों की ओर से श्रद्धांजलि दी जा रही है।