कस्बे के वीर तेजाजी चौक गडाई तालाब के पास चल रहे वीर तेजाजी मारवाड़ी लावणी के खेल के दूसरे दिन भक्ति और लोक संस्कृति से सराबोर माहौल रहा। कलाकारों ने तेजाजी के जीवन प्रसंगों का भावपूर्ण मंचन किया। खेल में तेजाजी का अपनी मां और बहन से आज्ञा लेना दिखाया गया। साथीड़ा के साथ ससुराल पनेर के लिए रवाना होने का प्रसंग भी आया। रास्ते में खेत में लगी आग के बीच वासुकि नाग दिखा। तेजाजी ने उसे बचाया। वासुकि नाग ने कहा कि नियम के अनुसार वह तेजाजी को डसे बिना आगे नहीं जाने देगा। तेजाजी ने ससुराल में अपना काम पूरा करने के बाद लौटकर वचन निभाने की बात कही। इसके बाद ससुराल पहुंचने का दृश्य दिखाया गया। हीरा गुर्जरी के यहां रात्रि विश्राम सहित कई प्रसंग संवाद और अभिनय से पेश किए गए। कलाकारों के संवाद और अभिनय ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध किया।संचालन गोभक्त डालचंद कुमावत ने किया। वासुकि नाग का पात्र शांतिलाल जाट ने निभाया। तेजाजी का पात्र किशन जाट ने निभाया। इससे पहले बाबूलाल पूर्विया ने गजानंदजी की लावणी पेश कर शुरुआत की। खेल का निर्देशन हिम्मत सुथार ने किया।