निगम प्रशासन की लापरवाही और बदइंतजामी के चलते शहर का एकमात्र क्लॉथ बैंक 10 महीनों से कबाड़खाने में तब्दील हो चुका है। गरीबों और जरूरतमंदों को मुफ्त कपड़े मुहैया कराने के लिए पंचवटी स्थित सामुदायिक केंद्र में शुरू हुआ यह बैंक पिछले साल नवंबर से ताले में बंद है। बड़ी वजह ये भी है कि नगर निगम ने क्लॉथ बैंक संभालने वाले कर्मचारियों का 6 महीने का वेतन ही नहीं चुकाया। वेतन न मिलने पर जब कर्मचारियों ने काम बंद किया, तब भी निगम अधिकारियों ने न तो उनका भुगतान किया और न ही केंद्र चलाने की कोई वैकल्पिक व्यवस्था बनाई। अनदेखी इस कदर है कि केंद्र के बाहर बंद होने की कोई सूचना तक नहीं है। लोग रोजाना इस्तेमाल लायक कपड़े दान करने पहुंचते हैं, लेकिन ताला देखकर पोर्च में ही छोड़ जाते हैं। इस वक्त वहां 2 से 3 हजार कपड़ों का ढेर लगा है, जो बारिश, धूल और गंदगी से सड़कर कचरा बन रहे हैं। अनदेखी: केंद्र बंद होने की सूचना नहीं, लगातार दान से हजारों कपड़ों का ढेर 2016-17 में हुई थी शुरुआत : जरूरतमंदों की मदद के लिए निगम ने यह बैंक शुरू कर संचालन ट्रिपल आर संस्था को सौंपा था। 6 साल से काम कर रहीं कर्मचारी सुनीता खटीक ने बताया कि 6 महीने का वेतन अटकने के बाद उन्होंने निगम में गुहार लगाई, लेकिन सुनवाई नहीं हुई। जरूरतमंद वापस लौट रहे, भिखारी छान रहे कपड़े : शहर और आसपास के गांवों से आने वाले गरीब लोग ताला देखकर खाली हाथ लौट रहे हैं। केवल भिक्षावृत्ति करने वाले लोग बाहर बिखरे ढेर से अपनी जरूरत के कपड़े छांटकर ले जाते हैं, बाकी वहीं बिखरे रहते हैं। अधिकारियों का घिसा-पिटा जवाब: इस गंभीर लापरवाही पर निगम अधिकारियों का कहना है कि अब बाहर बिखरे कपड़ों को अंदर रखवाया जाएगा और किसी दूसरी संस्था को सौंपकर बैंक दोबारा चालू करेंगे।