नागौर राजस्थान के सरकारी स्कूलों में शनिवार की पढ़ाई का स्वरूप अब पहले से अलग होगा। राजस्थान स्कूल शिक्षा परिषद ने शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए ‘नो बैग डे’ यानी ‘खुशनुमा शनिवार’ की मानक संचालन प्रक्रिया जारी की है। इसके तहत हर महीने के दूसरे और चौथे शनिवार को विद्यार्थियों को नियमित कक्षा-केंद्रित पढ़ाई के बजाय गतिविधि आधारित और अनुभवात्मक सीख से जोड़ा जाएगा। कार्यक्रम कक्षा 1 से 12 तक लागू होगा और विद्यार्थियों को उनकी कक्षा व सीखने के स्तर के अनुसार पांच समूहों में बांटा गया है। नई व्यवस्था में कक्षा 1-2 के विद्यार्थियों को ‘अंकुर’, कक्षा 3-5 को ‘प्रवेश’, कक्षा 6-8 को ‘दिशा’, कक्षा 9-10 को ‘क्षितिज’ और कक्षा 11-12 को ‘उन्नति’ समूह में रखा गया है। गतिविधियों का चयन भी इन समूहों की उम्र, सीखने के स्तर और अपेक्षित दक्षताओं के अनुसार किया जाएगा। शनिवार का समय दो हिस्सों में बांटा जाएगा। मध्याह्न पूर्व सत्र में करीब 60 मिनट की गतिविधि उस महीने की निर्धारित थीम या विषय के अनुसार होगी, जबकि मध्याह्न बाद करीब 60 मिनट का सत्र बच्चों की रुचि, स्थानीय परिस्थितियों और कौशल आधारित गतिविधियों के लिए रखा जाएगा। स्कूल जरूरत के अनुसार गतिविधियों में बदलाव कर सकेंगे, लेकिन सीखने के उद्देश्य और गुणवत्ता बनाए रखना जरूरी होगा। बच्चों की सुरक्षा को भी एसओपी का अहम हिस्सा बनाया है। गतिविधियों के दौरान आयु के अनुरूप सुरक्षा सावधानियां रखने, प्राथमिक उपचार पेटी उपलब्ध कराने और सुरक्षित वातावरण सुनिश्चित करने के निर्देश हैं। बाल संरक्षण के तहत सुरक्षित स्पर्श-असुरक्षित स्पर्श, साइबर सुरक्षा, जिम्मेदार इंटरनेट उपयोग और नशे के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूकता गतिविधियां भी कराई जाएंगी। विशेष आवश्यकता वाले बच्चों को भी उनकी क्षमता के अनुसार गतिविधियों में समान और सक्रिय भागीदारी का अवसर देना होगा। हर गतिविधि के बाद उसका रिकॉर्ड भी रखना होगा। विद्यालयों को उपस्थिति, गतिविधि की रिपोर्ट, फोटो-वीडियो, विद्यार्थियों के कार्य, नवाचार और स्थानीय स्तर की अच्छी पहल का दस्तावेजीकरण करना होगा। बेहतर गतिविधियों और नवाचारों को ब्लॉक, जिला और राज्य स्तर पर ‘श्रेष्ठ प्रथाओं’ के रूप में साझा किया जा सकेगा। खास बात यह है कि सीखना केवल कक्षा और किताब तक सीमित नहीं रहेगा। स्कूल स्थानीय स्तर पर उपलब्ध प्राकृतिक, पुन: उपयोग योग्य और कम लागत वाली सामग्री का इस्तेमाल कर सकेंगे। विशेषज्ञों, शिल्पकारों, उद्यमियों, स्वास्थ्यकर्मियों, कृषि विशेषज्ञों और प्रशासनिक अधिकारियों को जरूरत के अनुसार बच्चों से संवाद के लिए बुलाया जा सकेगा। 9वीं से 12वीं के विद्यार्थियों के लिए ‘खुशनुमा शनिवार’ में करियर शिक्षा और मार्गदर्शन को विशेष जगह दी गई है।