एसओजी की गिरफ्त में आया रानीवाड़ा का 8वीं पास गायनेकोलॉजिस्ट नानजीराम चौधरी राजनीति में भी भाग्य आजमा चुका था। वर्ष 2015 में अपने गांव दहीपुर में सरपंच का चुनाव हारने के बाद उसने बतौर डॉक्टर प्रैक्टिस करनी शुरू की थी। वर्ष 2016 में सांचौर रोड स्थित जिस राजदेव क्लीनिक पर बतौर स्वीपर, रिसेप्शनिस्ट काम करता था उसे अपने हमनाम पार्टनर के साथ मिलकर लीज पर ले लिया। सालभर के बाद पार्टनर के अलग होने पर क्लीनिक का नाम बदल दिया था। यहां डिग्रीधारी फिजीशियन को हायर कर गर्भवती का इलाज करने के साथ डिलीवरी और सर्जरी भी करने लगा। शुरुआत में प्रसव कराता था और बाद में जनरल सर्जरी, जैसे हर्निया और पथरी के ऑपरेशन करने भी शुरू कर दिए। दिखावे के लिए गुजरात के कुछ सर्जन नियुक्त किए, लेकिन उनका राजस्थान मेडिकल काउंसिल में पंजीकरण ही नहीं था। यानी उन सर्जन के नाम पर वह खुद ही ऑपरेशन करता था। वहां 8 माह में 1200 से अधिक सर्जरी कर चुका था। लीज पर लिए क्लीनिक से नानजीराम चौधरी इतना नाम बना चुका था कि अक्टूबर 2024 में बड़गांव रोड पर खुद का अस्पताल (भास्कर मल्टी स्पेशलिटीज हॉस्पिटल) शुरू कर दिया। इन 8 सालों में उसने सालाना औसत 150 से 200 प्रसव भी कराए। नए अस्पताल में केस बिगड़ा तो गुजरात के विशेषज्ञ डॉक्टर से अनुबंध कर लिया : खुद का नया अस्पताल खोलने के 1 माह में ही महिला मरीज का केस बिगड़ गया। रेफर की महिला की मौत के बाद परिजनों ने हंगामा कर दिया था। हालांकि बाद में समझौता हो गया। तब नानजीराम की डिग्री पर सवाल उठे थे। उसके बाद उसने खुलकर प्रैक्टिस करना बंद कर दिया। इसके बाद गुजरात के विशेषज्ञ डॉक्टरों से अनुबंध कर लिया था। विशेषज्ञाें को ऑन-कॉल बुलाने लगा। नया अस्पताल नाले के बहाव क्षेत्र में भी आ रहा है। सीएचसी में बंद ऑपरेशन थियेटर का फायदा उठाया : पुराने क्लीनिक में रोज 50 की ओपीडी रहती थी। एक प्रमुख कारण था रानीवाड़ा के सरकारी अस्पताल (सीएचसी) में करीब 12 साल से ऑपरेशन थियेटर बंद होना। क्षेत्र के जो मरीज गुजरात नहीं जा सकते थे, वे नानजीराम चौधरी के अस्पताल में आने लगे। गायनेकोलॉजिस्ट ही नहीं, डॉक्टरेट की मानद उपाधि भी जुगाड़ ली : नानजीराम ने शैक्षणिक डिग्रियों, एमबीबीएस, गायनेकोलॉजिस्ट ही नहीं साउथ वेस्टर्न अमेरिकन यूनिवर्सिटी से सोशल वर्क विषय में मानद डॉक्टरेट की उपाधि भी जुगाड़ ली थी, जबकि इस विश्वविद्यालय की मान्यता ही वैध नहीं थी। नानजीराम खुद को डॉक्टर बताने के लिए अपना नाम डॉ. एनआर चौधरी लिखता था और साथ में डिग्री की तरह MDBH शब्द लिखता था। वैसे यह किसी मेडिकल डिग्री का नाम नहीं, बल्कि इसका मतलब निकाल रखा था-मैनेजिंग डायरेक्टर ऑफ भास्कर हॉस्पिटल।