बाड़मेर | कृषि विश्वविद्यालय जोधपुर और एकीकृत ग्रामीण आजीविका परियोजना बीएलएमसीएल की ओर से आयोजित पांच दिवसीय भेड़ एवं बकरी पालन प्रशिक्षण का समापन हरियाली नाडी भाडखा में हुआ। कार्यक्रम में किसानों, पशुपालकों को वैज्ञानिक तरीके से भेड़-बकरी पालन के लिए तकनीकी, व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया। समापन सत्र में केकेवीके के परियोजना प्रभारी डॉ. प्रदीप पगारिया ने कहा कि वैज्ञानिक पशुपालन ग्रामीण परिवारों की आय बढ़ाने का जरिया बन सकता है। उन्होंने नस्ल चयन, उचित आवास, संतुलित आहार, स्वच्छ पेयजल, स्वास्थ्य प्रबंधन, नियमित टीकाकरण पर ध्यान देने की बात कही। उन्होंने राज्य, केंद्र की पशुपालन योजनाओं की जानकारी दी। नोडल अधिकारी डॉ. प्रियंका स्वामी ने कृषि, पशुपालन में मौसम आधारित प्रबंधन की जरूरत बताई। उन्होंने स्थानीय मौसम के अनुसार पशु प्रबंधन अपनाने की सलाह दी। डॉ. सीमा ने मृदा, प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन पर बात रखी। उन्होंने कृषि-पशुपालन के समन्वय से आजीविका को टिकाऊ बनाने के उपाय बताए। प्रशिक्षण में उन्नत नस्लों का चयन, स्थानीय परिस्थितियों के अनुकूल नस्लें, वैज्ञानिक आवास प्रबंधन, पोषण, चारा प्रबंधन, प्रजनन प्रबंधन, नवजात मेमनों, बच्चों की देखभाल, टीकाकरण, रोग नियंत्रण, स्वच्छता, पशु स्वास्थ्य प्रबंधन जैसे विषय शामिल रहे। किसानों को सत्रों के साथ व्यावहारिक अभ्यास भी कराया गया। परियोजना के यंग प्रोफेशनल अनिल कुमार ने प्रशिक्षण की गतिविधियों के बारे में बताया।