जैन श्वेतांबर तेरापंथ धर्मसंघ के ग्यारहवें आचार्य महाश्रमण के सान्निध्य में लाडनूं स्थित जैन विश्व भारती परिसर में योगक्षेम वर्ष के तहत धार्मिक एवं आध्यात्मिक कार्यक्रम जारी हैं। सुधर्मा सभा में मंगल प्रवचन के दौरान आचार्य ने ‘अनासक्ति से क्या मिलेगा?’ विषय पर श्रद्धालुओं को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि व्यक्ति, वस्तु या स्थान के प्रति अत्यधिक लगाव दुःख का कारण बन सकता है। साधु जीवन में आसक्ति से दूर रहकर विवेकपूर्ण ढंग से निरंतर विहार करते रहना चाहिए। उन्होंने कहा कि किसी स्थान, व्यक्ति या वस्तु से बंध जाना प्रतिबद्धता है, जिससे राग और दुःख की संभावना बढ़ती है। साधु को एक ही स्थान पर लंबे समय तक ठहरने के बजाय परिस्थितियों के अनुरूप विहार करते रहना चाहिए। शारीरिक विवशता की स्थिति अलग हो सकती है। मर्यादावली, हाजरी और लेखपत्र का नियमित वाचन साधुओं को संयम और अप्रतिबद्धता के प्रति जागरूक रखता है। कल होगा जैन भगवती दीक्षा समारोह : रविवार को आचार्य महाश्रमण के सान्निध्य में जैन भगवती दीक्षा समारोह होगा। इसमें मुमुक्षु बाबूलाल बाफना, सुमन नाहटा, सुमन बैद, रुचिका मालू, भावना नाहटा और कोमल भंसाली को दीक्षा प्रदान की जाएगी। समारोह को लेकर तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। धर्मसंघ के अनुयायियों और श्रद्धालुओं में आयोजन को लेकर उत्साह है।