हनुमानगढ़ के श्री खुशाल दास विश्वविद्यालय में राष्ट्रीय फॉरेंसिक साइंस वीक 2026 के तहत फॉरेंसिक साइंस और साइबर फॉरेंसिक विभाग की ओर से वेबिनार आयोजित किया गया। वेबिनार फॉरेंसिक क्षेत्र के विशेषज्ञों ने विद्यार्थियों को क्राइम सीन इन्वेस्टिगेशन की प्रक्रिया, उसकी व्यावहारिक चुनौतियों तथा नारकोटिक्स व साइकोट्रॉपिक पदार्थों की फॉरेंसिक पहचान और वैज्ञानिक विश्लेषण के बारे में जानकारी दी। विशेषज्ञों ने अपने अनुभव साझा करते हुए आपराधिक जांच में वैज्ञानिक साक्ष्यों की भूमिका को समझाया। वैज्ञानिक तरीके से सबूतों की जांच जरूरी श्री गुरु गोबिंद सिंह चैरिटेबल ट्रस्ट के अध्यक्ष बाबूलाल जुनेजा ने कहा कि फॉरेंसिक विज्ञान आज की आपराधिक जांच का अहम हिस्सा है। वैज्ञानिक तरीकों से सबूतों की सही जांच होने से जांच प्रक्रिया मजबूत होती है। उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि वे वेबिनार से मिले ज्ञान का इस्तेमाल अपनी पढ़ाई और भविष्य के करियर में करें। विश्वविद्यालय के एमडी दिनेश कुमार जुनेजा ने कहा कि वर्तमान समय में फॉरेंसिक विज्ञान और साइबर फॉरेंसिक का महत्व लगातार बढ़ रहा है। विश्वविद्यालय का प्रयास है कि विद्यार्थियों को नई वैज्ञानिक तकनीकों और जांच के आधुनिक तरीकों की जानकारी मिले, ताकि वे भविष्य की जरूरतों के लिए तैयार हो सकें। ऐसे विशेष व्याख्यान विद्यार्थियों के ज्ञान और कौशल को बढ़ाने में मदद करते हैं। क्राइम सीन की जांच में हर सबूत महत्वपूर्ण विभागाध्यक्ष शालिनी चौहान ने कहा कि फॉरेंसिक विज्ञान से जुड़े विषय विद्यार्थियों के लिए बेहद उपयोगी हैं। क्राइम सीन इन्वेस्टिगेशन और नारकोटिक्स व साइकोट्रॉपिक पदार्थों की वैज्ञानिक पहचान व विश्लेषण को समझना फॉरेंसिक विज्ञान के विद्यार्थियों के लिए जरूरी है। ऐसे विशेष सत्रों से विद्यार्थी विषय के प्रैक्टिकल पहलुओं को समझ पाते हैं और किताबी जानकारी को वास्तविक परिस्थितियों से जोड़ सकते हैं। पहले सत्र में टीकमगढ़, मध्य प्रदेश के जिला वैज्ञानिक अधिकारी डॉ. प्रदीप यादव ने ‘क्राइम सीन इन्वेस्टिगेशन एंड इट्स चैलेंजेज’ विषय पर जानकारी दी। उन्होंने विद्यार्थियों को अपराध स्थल की वैज्ञानिक जांच, सबूतों की पहचान, रिकॉर्ड तैयार करने, उन्हें सुरक्षित रखने और एकत्र करने की प्रक्रिया समझाई। उन्होंने क्राइम सीन इन्वेस्टिगेशन के दौरान आने वाली व्यावहारिक चुनौतियों और वैज्ञानिक तरीके से सबूत जुटाने के महत्व पर भी प्रकाश डाला। नारकोटिक्स पदार्थों की फॉरेंसिक पहचान समझाई दूसरे विशेषज्ञ सत्र में सीएफएसएल गुवाहाटी के हेड ऑफ डिवीजन/साइंटिस्ट-बी (नारकोटिक्स) सोनू मौर्य ने ‘नारकोटिक्स ड्रग्स एंड साइकोट्रॉपिक सब्सटेंस: फॉरेंसिक आइडेंटिफिकेशन एंड एनालिसिस’ विषय पर विद्यार्थियों को संबोधित किया। उन्होंने नारकोटिक्स एवं साइकोट्रॉपिक पदार्थों की फॉरेंसिक पहचान, नमूनों के वैज्ञानिक परीक्षण और विश्लेषण की प्रक्रिया के बारे में जानकारी दी। साथ ही, आपराधिक जांच में प्रयोगशाला आधारित वैज्ञानिक साक्ष्यों की भूमिका पर प्रकाश डाला। सवाल-जवाब से विद्यार्थियों की जिज्ञासाओं का समाधान विशेषज्ञों के व्याख्यान के दौरान विद्यार्थियों ने फॉरेंसिक जांच से जुड़े विभिन्न पहलुओं को समझा। इसके बाद सवाल-जवाब सत्र में विद्यार्थियों ने विशेषज्ञों से अपनी जिज्ञासाओं और विषय से जुड़े सवालों पर चर्चा की। विशेषज्ञों ने विद्यार्थियों के सवालों के जवाब देते हुए फॉरेंसिक जांच के व्यावहारिक पहलुओं को और स्पष्ट किया।