राजधानी में दिवाली पर बाजारों में सजने वाले स्वागत गेट अब व्यापारियों और व्यापार मंडलों के लिए फ्री विज्ञापन का जरिया नहीं होंगे। नगर निगम ने दिवाली के दौरान लगाए जाने वाले सजावटी और विज्ञापन द्वारों को लेकर नए निर्देश जारी किए हैं। अब किसी गेट पर संस्था, दुकान या एजेंसी का विज्ञापन लगाया जाता है तो इसके लिए निगम में निर्धारित विज्ञापन शुल्क देना होगा। शुल्क जमा नहीं कराने पर निगम उसे अवैध मानकर हटाएगा। निगम आयुक्त ओम प्रकाश कसेरा की स्वीकृति के बाद उपायुक्त राजस्व प्रथम नवीन भारद्वाज ने इस संबंध में आदेश जारी किए हैं। आदेश में सभी जोन उपायुक्तों को अपने क्षेत्र में नियमों की पालना सुनिश्चित कराने के निर्देश दिए गए हैं। हर साल सजावट के नाम पर गेट, उसी पर विज्ञापन दिवाली से पहले शहर के प्रमुख बाजारों में व्यापार मंडल और दुकानदार सजावट के लिए स्वागत गेट लगाते हैं। इन गेटों पर बाजार का नाम, शुभकामना संदेश के साथ किसी संस्था, दुकान या कंपनी का विज्ञापन भी लगाया जाता है। अब तक ऐसे गेटों पर लगने वाले विज्ञापनों से निगम को शुल्क नहीं मिलने की स्थिति रहती थी। निगम का कहना है कि इससे अधिकृत विज्ञापन साइटों के साथ उसके राजस्व पर भी असर पड़ता है।अब निगम ने साफ कर दिया है कि गेट सजावट के लिए हो, लेकिन उस पर विज्ञापन लगा है तो विज्ञापन शुल्क देना होगा। स्वीकृत विज्ञापन साइट ढकी तो गेट भी हटेगा निगम ने कहा है कि शहर में लगाए जाने वाले सभी सजावटी और विज्ञापन द्वार नगर निगम जयपुर विज्ञापन उपविधियां-2004 और संशोधित विज्ञापन उपविधियां-2008 के प्रावधानों के अनुसार ही लगाए जा सकेंगे। इसके लिए संबंधित जोन उपायुक्त से स्वीकृति लेनी होगी। सजावटी गेट इस तरह नहीं लगाए जा सकेंगे कि निगम की पहले से स्वीकृत विज्ञापन साइट दिखाई ही न दे। यदि किसी गेट से अधिकृत होर्डिंग या विज्ञापन साइट ढकती है या गेट नियमों के विपरीत लगाया जाता है तो निगम कार्रवाई करेगा। विज्ञापन लगाना है तो इस प्रोसिजर से गुजरना पड़ेगा सजावटी गेट लगाने के लिए जोन उपायुक्त की स्वीकृति जरूरी। गेट पर विज्ञापन लगाने पर निर्धारित शुल्क देना होगा। बिना शुल्क का विज्ञापन अवैध होगा। स्वीकृत विज्ञापन साइट को ढकने वाला गेट हटाया जा सकता है। नियम तोड़ने पर निगम कार्रवाई करेगा। नियम विज्ञापन उपविधि-2004 और संशोधित उपविधि-2008 के तहत लागू होंगे।