जयपुर में एक सीबीआई कर्मचारी के प्लॉट को हड़पने की साजिश का मामला सामने आया है। फेक डॉक्यूमेंट से तैयार इकरारनामे के जरिए प्लॉट्स हड़पने की प्लानिंग का आरोप लगाया गया है। दबाव बनाने के लिए क्रॉस FIR तक दर्ज करवाई गई। अब पीड़ित ने 7 साल पहले दर्ज करवाई FIR पर न्याय की गुहार लगाई है। सीबीआई दिल्ली हेडक्वार्टर में तैनात पीड़ित ओंकार मीणा की ओर से शनिवार दोपहर प्रेस कॉफ्रेंस रखी गई। उन्होंने बताया- साल 1994 में पिता शिवशंकर ने हाउसिंग को-ऑपरेटिव सोसाइटी से मेरे और बड़े भाई सुखदेव मीणा के नाम से 200-200 वर्गगज के दो प्लॉट खरीदे थे। आरोप है कि दोनों प्लॉट को हड़पने की साजिश के चलते जितेंद्र भंडारी, राकेश कुमार और सतीश ने साल-2008 में एक कथित फेक इकरारनामा तैयार किया। फेक इकरारनामा पर दर्ज कराई FIR पीड़ित का आरोप है कि जनवरी-2020 में अपने दोनों प्लॉट के लिए जेडीए में लीजडीड के लिए आवेदन किया। आरोपियों की ओर से साल-2008 का बना इकरारनामा आरोपियों की ओर से जेडीए में पेश किया गया। फेक इकरारनामा का पता चलने पर पीड़ित पक्ष की ओर से साल-2020 में प्रताप नगर थाने में रिपोर्ट दर्ज करवाई गई। सालभर बाद किया क्रॉस केस बजाज नगर थाने में आरोपी पक्ष राकेश कुमार के खिलाफ से फरवरी-2021 में FIR दर्ज करवाई गई। शिकायत में दोनों प्लाट के एवज में 2.31 लाख (प्रति प्लाट) कैश में खरीदना बताया। जिसमें आरोप लगाया कि दोनों प्लाट के डॉक्यूमेंट बनाकर जेडीए से पट्‌टे लेने के लिए आवेदन किया गया। पीड़ित का आरोप है कि दबाव बनाने के लिए बजाज नगर थाने में एक साल बाद FIR दर्ज करवाई गई। पुलिस की जांच के 7 साल बीतने के बाद भी न्याय नहीं मिल सका। पीड़ित पक्ष की ओर से पुलिस आलाधिकारियों से पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराकर उचित कार्रवाई सुनिश्चित करने की अपील की।