जयपुर पुलिस ने अंतरराज्यीय साइबर ठग गिरोह के 8 आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जिनमें दो महिलाएं भी शामिल है। आरोपी सोशल मीडिया पर पुराने नोट और सिक्कों की फोटो डालकर लोगों को अपने जाल में फंसाते थे। फेसबुक पर विज्ञापन देखकर संपर्क करने वाले लोगों को व्हाट्सऐप के जरिए पुराने नोट-सिक्कों के बदले लाखों रुपए मिलने का झांसा देते थे। गिरोह तमिलनाडु, केरल सहित कई राज्यों में लोगों को ठगी का शिकार बना रहा था। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से मोबाइल, फर्जी बैंक चेकबुक और कार भी जब्त की है। कार्रवाई जयपुर नॉर्थ की साइबर सेल और जयालपुर थाना पुलिस ने की। पुलिस टीम ने ऐसे पकड़ा गिरोह डीसीपी नॉर्थ करण शर्मा के निर्देशन में गठित टीम ने दूसरे राज्यों से जयपुर आकर ठिकाना बनाकर रह रहे संदिग्ध लोगों की गतिविधियों पर निगरानी शुरू की। टीम को सूचना मिली कि एक मकान में संदिग्ध लोग रह रहे हैं और उनके पास अलग-अलग राज्यों के लोग आते-जाते हैं। निगरानी के दौरान पुलिस को एक स्कॉर्पियो में दो लोगों के बंधक बनाए जाने की सूचना मिली। इसके बाद टीम ने मौके पर कार्रवाई कर आरोपियों को दबोच लिया और बंधक बनाए गए लोगों को मुक्त कराया। 1500 रुपए रजिस्ट्रेशन से शुरू होती थी ठगी डीसीपी नॉर्थ करण शर्मा ने बताया कि गिरोह के सदस्य ग्राहक को पहले कंपनी में रजिस्ट्रेशन के नाम पर 1500 रुपए जमा करवाते थे। इसके बाद पुराने नोटों या सिक्कों की कीमत लाखों रुपए बताकर वीडियो और दस्तावेज भेजे जाते थे। आरोपी पुराने नोटों की डील पूरी होने से पहले 18 प्रतिशत GST, एडवांस, डिस्पैच चार्ज और अन्य शुल्क के नाम पर पीड़ित से रकम मांगते थे। पीड़ित के रुपए देने से इनकार करने पर आरोपी उसके साथ दुर्व्यवहार करते और फोन नंबर ब्लॉक कर देते थे। तमिलनाडु और केरल में फैला नेटवर्क आरोपियों ने पुलिस को बताया कि गिरोह के सदस्य तमिलनाडु, केरल और अन्य राज्यों में अलग-अलग स्थानों पर इसी तरह की ठगी कर रहे थे। गिरोह में अलग-अलग भूमिकाओं में महिला और पुरुष सदस्य शामिल थे। पुलिस अब गिरोह से जुड़े अन्य लोगों और देशभर में किए गए साइबर अपराधों की जानकारी जुटा रही है। मोबाइल फोन और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की जांच शुरू पुलिस ने आरोपियों के जब्त मोबाइल फोन और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की जांच शुरू कर दी है। इनके जरिए सोशल मीडिया अकाउंट, व्हाट्सऐप चैट, बैंक लेनदेन और देश के अलग-अलग हिस्सों में किए गए साइबर फ्रॉड की जानकारी जुटाई जा रही है। पुलिस को गिरोह के अन्य सदस्यों के बारे में भी महत्वपूर्ण सुराग मिलने की संभावना है।