परिवहन सेवाओं को आसान बनाने का दांव आमजन पर भारी पड़ रहा है। पुराने ड्राइविंग परमिट और वाहन पंजीयन (आरसी) को नए ऑनलाइन सिस्टम में दर्ज कराने का अधिकार स्थानीय आरटीओ से छीनकर जयपुर मुख्यालय को दे दिया गया है। जो काम पहले उदयपुर कार्यालय में 30 से 40 मिनट में निपट जाते थे, वे अब जयपुर में बढ़ते वर्कलोड और जटिल प्रक्रिया के कारण महीनों से लंबित हैं। पुराने परमिट में पता बदलने, नवीनीकरण या मोबाइल नंबर अपडेट करने जैसे कामों के लिए एंट्री अपडेट करना अनिवार्य है। उदयपुर में हर माह औसतन 200 ऐसे मामले आते हैं। 20 अगस्त से स्थानीय व्यवस्था बंद कर ईमेल से जयपुर फाइलें भेजी जा रही हैं। तब से अब तक भेजे गए 43 आवेदनों में से एक को भी अप्रूवल नहीं मिला है। पंजीयन अपडेट कराने की स्थिति और भी बदतर है। जहां हर महीने 100 फाइलें निपटती थीं, वहीं बीते 4 महीनों में सिर्फ 5 आवेदन ही मंजूर हो सके हैं। वे भी तब, जब वाहन स्वामियों ने खुद जयपुर जाकर पैरवी की। इस बीच विभाग ने दस्तावेजों का फॉर्मेट ही 3 बार बदल दिया, जिससे उलझन और बढ़ गई। कागजी चक्कर: 1 फाइल, 2 बार जयपुर और 5 राउंड स्थानीय स्तर पर एमवीआई और डीटीओ के हस्ताक्षर व वाहन की फोटो जांच के बाद फाइल पहली बार जयपुर भेजी जाती है। वहां से प्राथमिक हरी झंडी मिलने पर उदयपुर में डेटा सत्यापन होता है। इसके बाद अंतिम अप्रूवल के लिए फाइल दोबारा जयपुर जाती है, तब जाकर डेटा ऑनलाइन दर्ज होता है। सवाल पर आरटीओ ज्ञानदेव विश्वकर्मा का कहना है कि प्रक्रिया अब मुख्यालय स्तर से संचालित हो रही है। हम यहां से दस्तावेज समय पर भेज देते हैं। जयपुर में अप्रूवल में देरी क्यों हो रही है, इसके कारणों की जानकारी नहीं है।