दूसरे देशों से MBBS कर एफएमजीई परीक्षा पास कर इंटर्नशिप कर रहे डॉक्टर्स 7 दिन से चिकित्सा शिक्षा निदेशालय के कैंपस में प्रदर्शन कर रहे हैं। लगभग 300 स्टूडेंट्स दिन-रात निदेशालय के कैंपस में ही बैठे रहते हैं। फॉरेन मेडिकल ग्रेजुएट्स (एफएमजी) की मांग है कि इंटर्नशिप के बदले 21 हजार 700 रुपए का स्टाईपेंड मिले। डॉक्टर्स ने कहा- जब इंडियन मेडिकल ग्रेजुएट्स को इंटर्नशिप के लिए स्पाईपेंड मिल सकता है तो हमें क्यों नहीं मिल सकता। स्टूडेंट्स ने कहा- हम काम करते हैं और ड्यूटी भी बाकी स्टू़डेंट्स के बराबर करते हैं तो बराबर का सम्मान भी मिलना चाहिए। यहां प्रदर्शन कर रहे डॉ संजीव गढ़वाल ने कहा- जब बाकी राज्यों में एफएमजी इंटर्न को स्टाईपेंड मिलता है तो राजस्थान सरकार क्यों नहीं देती है। कहने को डॉक्टर, लेकिन सैलरी नहीं- FMG डॉक्टर सवाई माधोपुर से आईं डॉ. सानिया चौधरी ने कहा- हम लोग भी वहीं काम करते हैं, जो आईमजी (इंडियन मेडिकल ग्रेजुएट्स) कर रहे हैं। हमें यहां से कोई रिप्लाई नहीं मिल रहा है। हमें इग्नोर किया जा रहा है। छात्रा ने कहा- हम सिर्फ कहने को डॉक्टर बने हैं, लेकिन सैलरी नहीं मिल रही है। घरवालों से कब तक पैसे मांगते रहेंगे। एग्जाम क्लियर कर इंटर्नशिप कर रहे, फिर भी सैलरी नहीं गिर्गीस्तान से MBBS कर आए बांसवाड़ा के रहने वाले डॉ. विश्वास ने कहा- मैंने जिस कॉलेज से पढ़ाई की, उस कॉलेज को राजस्थान मेडिकल काउंसिल ने भी मान्यता दे रखी है। उन्होंने कहा- हमने एग्जाम क्लियर किया। इसके बाद इंटर्नशिप कर रहे हैं, फिर भी हमें कुछ नहीं मिल रहा। सब लोग यहां पढ़े-लिखे हैं, लेकिन फिर भी उन्हें रोड पर आना पड़ रहा है। वहीं चिकित्सा शिक्षा के आयुक्त बी. लाल. गोयल ने कहा- विभाग ने स्टाईपेंड की फाइल को वित्त विभाग को कई बार भेज दी है। उनका कहना है कि विभाग ने अपना काम कर दिया। अब आगे वित्त विभाग की जिम्मेदारी है।