जयपुर में जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी अभिषेक सिद्ध की पहल पर प्रथम जिला स्तरीय मदरसा विज्ञान प्रदर्शनी ‘अन्वेषण 2K26’ का आयोजन किया गया। इस विज्ञान प्रदर्शनी में जिले के विभिन्न क्षेत्रों के मदरसों एवं आवासीय विद्यालय के विद्यार्थियों और शिक्षकों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया तथा विद्यार्थियों द्वारा विज्ञान एवं नवाचार पर आधारित विभिन्न मॉडल यथा चंद्रयान, वाटर हार्वेस्टिंग, थार कार, वेस्ट वाटर मैनेजमेंट, न्यूक्लियर पावर प्लांट आदि विभिन्न मॉडल प्रस्तुत किए गए। कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ। इसके पश्चात विज्ञान प्रार्थना प्रस्तुत की गई, जिसमें भारतीय वैज्ञानिक परंपरा एवं वैज्ञानिक चेतना का स्मरण किया गया। विद्यार्थियों द्वारा विज्ञान विषय पर आधारित नाट्य प्रस्तुति भी दी गई। विद्यार्थियों ने विज्ञान पर अपने विचार व्यक्त करते हुए विज्ञान की यात्रा को “प्रश्न से जिज्ञासा, जिज्ञासा से अन्वेषण, अन्वेषण से नवाचार और नवाचार से राष्ट्र निर्माण” से जोड़ा। जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी अभिषेक सिद्ध ने विज्ञान प्रदर्शनी के उद्देश्य एवं महत्व पर प्रकाश डालते हुए विद्यार्थियों को प्रश्न पूछने, प्रयोग करने तथा वैज्ञानिक दृष्टिकोण विकसित करने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि विज्ञान केवल पुस्तकों तक सीमित विषय नहीं है, बल्कि यह हमारे आसपास की दुनिया को समझने और जीवन की समस्याओं के समाधान खोजने की प्रक्रिया है। उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि यदि कोई प्रयोग पहली बार सफल नहीं होता है तो निराश होने की आवश्यकता नहीं है, क्योंकि विज्ञान में असफल प्रयोग भी हमें कुछ नया सिखाता है। उन्होंने विद्यार्थियों को प्रश्न पूछने, प्रयोग करने, गलतियों से सीखने और निरंतर प्रयास करते रहने के लिए प्रेरित किया। अभिषेक सिद्ध ने भारतीय ज्ञान परंपरा का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत में प्राचीन काल से ही प्रश्न, तर्क, गणना, प्रकृति के अध्ययन और प्रयोग की समृद्ध परंपरा रही है। आर्यभट से लेकर आधुनिक भारत के वैज्ञानिकों तक की यात्रा हमें यह संदेश देती है कि ज्ञान तभी सार्थक है, जब वह जिज्ञासा को जन्म दे और समाज के लिए उपयोगी बने। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों द्वारा तैयार किए गए मॉडल केवल कागज, तार, मोटर या मशीनों का संयोजन नहीं हैं, बल्कि इनमें उनकी कल्पना, मेहनत, आत्मविश्वास और कुछ नया करने की इच्छा दिखाई देती है। आज का एक छोटा-सा प्रयोग भविष्य के किसी बड़े आविष्कार की शुरुआत बन सकता है। प्रदर्शनी में प्रस्तुत विभिन्न वैज्ञानिक एवं नवाचार आधारित मॉडलों का निर्णायक मंडल द्वारा निरीक्षण एवं मूल्यांकन किया गया। निर्णायकों ने विद्यार्थियों से उनके मॉडल की कार्यप्रणाली, उपयोगिता, नवीनता एवं उद्देश्य के संबंध में संवाद किया। विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक अपने मॉडलों की जानकारी दी और निर्णायकों के प्रश्नों के उत्तर दिए। मूल्यांकन के पश्चात उत्कृष्ट मॉडल प्रस्तुत करने वाले जयपुर जिले के शीर्ष तीन मदरसों का चयन किया गया और मोमेंटो व प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि डॉ आशीष दत्त शर्मा ने भी विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए विज्ञान एवं नवाचार के क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने विज्ञान कों व्यवहारिक रूप से समझने पर बल दिया। कार्यक्रम के अंत में विद्यार्थियों एवं शिक्षकों के लिए भोजन की व्यवस्था की गई। इसके पश्चात राष्ट्रगान के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।