जैसलमेर जोन में सिंचाई पानी की पर्याप्त सप्लाई की मांग को लेकर किसानों ने बुधवार, 24 सितंबर को मोहनगढ़ स्थित नहर के जीरो हेड पर अनिश्चितकालीन धरना शुरू कर दिया। जिला प्रशासन और सिंचाई विभाग की ओर से तय अल्टीमेटम की अवधि 23 सितंबर को समाप्त होने के बाद किसानों ने आंदोलन शुरू किया। किसानों का कहना है कि उनके हिस्से का पानी पीछे के जोनों में मोड़ा जा रहा है, जिससे खरीफ की फसलें बर्बाद हो रही हैं। निर्धारित शेयर और क्षतिपूर्ति का पानी एकसाथ देने की मांग किसान नेता साभान खान ने बताया कि सिंचाई विभाग की कार्यशैली के कारण जैसलमेर जोन के किसानों को उनके हिस्से का पूरा पानी नहीं मिल पा रहा है। उन्होंने कहा कि फसलों को बचाने के लिए कम से कम निर्धारित शेयर और क्षतिपूर्ति का पूरा पानी एकसाथ मिलना जरूरी है, लेकिन प्रशासन इस ओर ध्यान नहीं दे रहा है। किसानों के अनुसार पानी की भारी किल्लत के कारण मूंग, मोठ और मूंगफली जैसी प्रमुख फसलें करीब 70 प्रतिशत तक सूख चुकी हैं। इससे किसानों के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। मांग पूरी नहीं हुई तो आंदोलन होगा तेज धरना स्थल पर किसानों ने कहा कि जब तक नहरों में सिंचाई पानी की सुचारू आपूर्ति शुरू नहीं होती, उनका आंदोलन जारी रहेगा। किसानों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही उनकी मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। इसकी पूरी जिम्मेदारी जिला प्रशासन और नहर प्रशासन की होगी।