जैसलमेर में राज्य पक्षी गोडावण (ग्रेट इंडियन बस्टर्ड) के संरक्षण की दिशा में जैसलमेर में महत्वपूर्ण कदम उठाया जा रहा है। करोड़ों रुपए की लागत से तैयार विशेष टनल में लंबे समय तक नेचुरल तरीके से जीवन जीने का प्रशिक्षण लेने के बाद 10 स्वस्थ गोडावण अब खुले जंगल में लौटने के लिए तैयार हैं। पहले चरण के तहत इन्हें 3 अक्टूबर को रामदेवरा और 4 अक्टूबर को सुदासरी (डेजर्ट नेशनल पार्क) क्षेत्र में प्राकृतिक वातावरण में छोड़ा जाएगा। इस मौके पर केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव के साथ कई उच्चाधिकारी और देश-विदेश के वन्यजीव विशेषज्ञ मौजूद रहेंगे। भारतीय वन्यजीव संस्थान (WII) की निगरानी में होने वाला यह प्रयास गोडावण को उसके प्राकृतिक आवास में सुरक्षित रूप से वापस स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। कच्छ की बजाय थार के प्राकृतिक आवास को चुना शुरुआत में गोडावण को गुजरात के कच्छ में छोड़ने की योजना बनाई गई थी। बाद में विशेषज्ञों की सलाह पर इन्हें थार के उनके मूल प्राकृतिक आवास में छोड़ने का निर्णय लिया गया। इसके लिए जैसलमेर के रामदेवरा और डेजर्ट नेशनल पार्क के सुदासरी क्षेत्र को चुना गया है। तय कार्यक्रम के अनुसार 3 अक्टूबर को रामदेवरा और 4 अक्टूबर को सुदासरी में गोडावण को खुले प्राकृतिक वातावरण में छोड़ा जाएगा। WII की निगरानी में कड़े प्रोटोकॉल वन विभाग के संरक्षण केंद्रों में फिलहाल रिलीज के लिए कुल 10 पक्षी स्वस्थ और तैयार हैं। हालांकि, पहले चरण में इनमें से कितने पक्षियों को सीधे खुले आवास में छोड़ा जाएगा। इसका अंतिम तकनीकी आकलन और निर्णय WII के वैज्ञानिकों के दिशा-निर्देशों के आधार पर किया जा रहा है। इन पक्षियों पर वैज्ञानिक निगरानी के साथ कड़े प्रोटोकॉल लागू किए जा रहे हैं, ताकि प्राकृतिक वातावरण में इनके व्यवहार और अनुकूलन पर नजर रखी जा सके। 2016 में शुरू हुआ था संरक्षण प्रोजेक्ट साल 2016 में इंटीग्रेटेड जीआईबी कंजर्वेशन प्रोजेक्ट की नींव रखी गई थी। इसके बाद 2019 में राजस्थान में बड़े स्तर पर गोडावण ब्रीडिंग प्रोग्राम शुरू किया गया। जैसलमेर के सम में अस्थायी केंद्र के बाद रामदेवरा में आधुनिक ब्रीडिंग सेंटर तैयार किया गया। मार्च 2023 में इस सेंटर में पहले कृत्रिम रूप से पोषित यानी कैप्टिव-ब्रेड चूजे का जन्म हुआ। इसके बाद वर्ष 2025 में पक्षियों को रीवाइल्डिंग के तहत जंगल में रहने का प्रशिक्षण दिया गया। गोडावण संरक्षण की दिशा में अहम कदम डेजर्ट नेशनल पार्क के डीएफओ चंद्रपाल चौहान ने बताया- यह पूरे प्रोजेक्ट का सबसे अहम और खुशी का पल है। करोड़ों रुपए की लागत से तैयार टनल में पक्षियों को इंसानी दखल से दूर रखकर जंगली माहौल में रहना सिखाया गया है। WII के विशेषज्ञों की देखरेख में इनके लिए कड़े प्रोटोकॉल तय किए गए हैं। उन्होंने कहा कि रामदेवरा और सुदासरी में गोडावण को छोड़ना इसके संरक्षण की दिशा में बड़ी सफलता है। सुप्रीम कोर्ट द्वारा तय किए गए 14 हजार 13 वर्ग किलोमीटर के प्रायोरिटी एरिया और गाइडलाइंस के तहत यह कदम उठाया जा रहा है। स्थानीय लोगों और पर्यावरण प्रेमियों के अनुसार, गोडावण की सुरक्षित वापसी केवल एक पक्षी के संरक्षण तक सीमित नहीं है, बल्कि थार की जैव-विविधता और प्राकृतिक पहचान के संरक्षण से भी जुड़ा प्रयास है। ये खबर भी पढ़ें… राजस्थान में 9 करोड़ की टनल बचाएगी 'गोडावण':64 मीटर लंबी सुरंग में चूजों को मिलेगी शिकार करने की ट्रेनिंग राज्य पक्षी गोडावण को विलुप्त होने से बचाने के लिए केंद्र सरकार और वन विभाग ने एक मास्टरप्लान तैयार किया है। जैसलमेर के रामदेवरा स्थित ब्रीडिंग सेंटर में 9.25 करोड़ रुपए की लागत से एक विशेष टनल बनाई गई है। पूरी खबर पढ़ें… … टनल में शिफ्ट हुए गोडावण, अब अकेले जीना सीखेंगे:खुद शिकार तलाशेंगे, जंगल जैसा माहौल मिलेगा; CCTV से 24 घंटे एक्सपर्ट रखेंगे नजर जैसलमेर में गोडावण के लिए टनल बनकर तैयार हो गई है। पोकरण क्षेत्र के रामदेवरा में बनाए गए रिवाइल्डिंग ढांचे (टनल) में ब्रीडिंग सेंटर से करीब एक महीने की उम्र के 3 नन्हे गोडावण के बच्चों को शिफ्ट (ट्रांसलोकेट) किया गया है। पूरी खबर पढ़ें…