जैसलमेर शहर में सुरक्षा और आपदा प्रबंधन को अधिक प्रभावी बनाने के लिए बुधवार को मोबाइल सिम आधारित हाईटेक सायरन प्रणाली की सफल टेस्टिंग की गई। सामरिक रूप से महत्वपूर्ण इस सीमावर्ती जिले में आपातकालीन हालातों से निपटने के लिए यह आधुनिक तकनीक बेहद कारगर साबित होगी। 'ऑपरेशन सिंदूर' के बाद शहर के 11 प्रमुख स्थानों पर स्थापित किए गए इन इलेक्ट्रिक सायरनों की तकनीकी क्षमता, आवाज की गूंज और नेटवर्क कनेक्टिविटी की बारीकी से जांच की गई। प्रशासन और केंद्रीय विशेषज्ञों की टीम की देखरेख में सुबह 10 बजे से दोपहर 1 बजे के बीच यह ट्रायल चलाया गया। मोबाइल से जुड़ते ही एक्टिव होता है सिस्टम इस सिस्टम की खासियत यह है कि यह मोबाइल सिम तकनीक पर काम करता है। आपात स्थिति या किसी भी खतरे के समय मोबाइल से तुरंत कमांड या सिग्नल मिलते ही यह ऑटोमेटिक तरीके से तेज आवाज में सायरन बजाना शुरू कर देता है। साथ ही, इस हाईटेक सुरक्षा कवच के जरिए शहरवासियों को उनके मोबाइल फोन पर तुरंत आपदा अलर्ट और चेतावनी भरे मैसेज भी मिल जाएंगे, जिससे कम से कम समय में लोगों तक सूचना पहुंचाई जा सकेगी। इन प्रमुख जगहों पर हुई टेस्टिंग शहर में सुरक्षा घेरे को मजबूत बनाने के लिए गोपा चौक सब्जी मंडी, जिला कलेक्ट्रेट कार्यालय, सीपीडब्ल्यूडी गेस्ट हाउस, जवाहर हॉस्पिटल का ट्रॉमा सेंटर, सोनार दुर्ग स्थित रानी महल, नगर परिषद कार्यालय, सूली डूंगर सनसेट पॉइंट, माहेश्वरी हॉस्पिटल के पास, रेंवतसिंह की ढाणी, पुलिस लाइन कच्ची बस्ती और इंदिरा कॉलोनी स्थित सभा भवन में इन सायरनों की टेस्टिंग पूरी की गई। प्रशासन ने पहले ही स्पष्ट कर दिया था कि यह सिर्फ एक तकनीकी और नियमित जांच है, ताकि किसी भी आपदा के समय शहर पूरी तरह सुरक्षित और सतर्क रहे।