जैसलमेर में इस बार सितंबर महीने की विदाई के वक्त मौसम अपने तीखे तेवरों से हर किसी को हैरान कर रहा है। अमूमन इस समय तक आसमान गुलाबी ठंडक की ओर अपने कदम बढ़ाने लगता है और लोगों को भीषण गर्मी से राहत मिलने की उम्मीद बंध जाती है, लेकिन इस बार स्थिति बिल्कुल उलट है। सितंबर के महीने में पड़ रही इस कड़ाके की गर्मी और उमस से आम जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हो गया है और राहत दूर-दूर तक नजर नहीं आ रही है। मौसम विभाग के पिछले 10 सालों के आंकड़े बताते हैं कि इतिहास में पहली बार सितम्बर के महीने में लगातार 6 दिनों तक पारा 40 डिग्री के पार टिका रहा। गर्मी से आम जनजीवन प्रभावित दोपहर के समय सड़कों पर सन्नाटा पसर जाता है और लोग घरों में ही रहने को मजबूर हैं। मौसम में आए इस अचानक बदलाव और भीषण गर्मी के कारण लोगों का घरों से बाहर निकलना मुहाल हो गया है। चिकित्सा विशेषज्ञों ने भी इस मौसम में लोगों को एहतियात बरतने और पर्याप्त मात्रा में पानी पीने की सलाह दी है, ताकि इस बेमौसम गर्मी के प्रकोप से बचा जा सके। फसलें बर्बाद हो रही हैं जिले के नहरी और बारानी इलाकों के किसानों पर इस मौसम का सबसे घातक असर हुआ है। अगस्त महीने में हुई छिटपुट बारिश के बाद किसानों ने बाजरा, ग्वार, तिल और मूंग की बुवाई की थी, लेकिन बारिश नहीं होने से खड़ी फसलें जलकर नष्ट हो रही हैं। पर्यटन स्थलों पर पसरा सन्नाटा इस भयंकर गर्मी और चिलचिलाती धूप का सीधा असर जैसलमेर के पर्यटन उद्योग पर भी पड़ रहा है। आमतौर पर सितंबर के आखिरी हफ़्तों में देशी-विदेशी पर्यटकों की आवक शुरू हो जाती है और यहां के ऐतिहासिक किले, गड़ीसर झील और अन्य दर्शनीय स्थल गुलजार रहने लगते हैं। लेकिन इस बार गर्मी के टॉर्चर के चलते प्रमुख पर्यटन स्थल सूने पड़े हैं। पर्यटकों की कमी के कारण पर्यटन से जुड़े कारोबारियों, होटल व्यवसायियों और गाइडों के चेहरों पर चिंता की लकीरें साफ देखी जा सकती हैं।