श्री राणी भटियाणी मंदिर संस्थान, जसोल में भाद्रपद शुक्ल पक्ष त्रयोदशी के अवसर पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। श्री राणीसा भटियाणीसा के पावन दिवसों में शामिल इस विशेष दिन सुबह मंगला आरती के साथ दर्शन का सिलसिला शुरू हुआ, जो दिनभर जारी रहा। जसोलधाम में मां राणीसा भटियाणीसा के जयकारों और भजनों से भक्तिमय माहौल बना रहा। राजस्थान सहित देश के अलग-अलग हिस्सों से श्रद्धालु जसोलधाम पहुंचे। कई भक्त सैकड़ों किलोमीटर की पदयात्रा कर आए, जबकि कुछ श्रद्धालु नंगे पांव मां के दरबार में पहुंचे। लंबी यात्रा की थकान के बावजूद श्रद्धालुओं में दर्शन को लेकर उत्साह नजर आया। कतार में लगकर किए मंदिरों में दर्शन श्रद्धालुओं ने निर्धारित व्यवस्था के अनुसार कतार में लगकर श्री राणीसा भटियाणीसा, श्री बायोसा, श्री सवाई सिंह जी, श्री लाल बन्ना सा, श्री खेतलाजी और श्री काला-गौरा भैरूजी के मंदिरों में दर्शन-पूजन किया। भक्तों ने मां के चरणों में शीश नवाकर परिवार की सुख-समृद्धि, स्वास्थ्य और खुशहाली की कामना की। त्रयोदशी के मौके पर बड़ी संख्या में नवविवाहित जोड़े भी जसोलधाम पहुंचे। नवविवाहितों ने मंदिर में दर्शन कर वैवाहिक जीवन में प्रेम, सुख, समृद्धि और शांति के लिए आशीर्वाद मांगा। छप्पन भोग, कन्या पूजन और भोजन प्रसादी के आयोजन त्रयोदशी के अवसर पर लाभार्थी हंसराज पुरोहित एवं उनके परिवार की ओर से श्री राणीसा भटियाणीसा सहित जसोलधाम स्थित सभी मंदिरों में छप्पन भोग और भोजन प्रसादी अर्पित की गई। इसके बाद श्रद्धालुओं के बीच प्रसादी का वितरण किया गया। लाभार्थी परिवार की ओर से सर्व समाज की कन्याओं का विधिवत पूजन भी किया गया। कन्याओं को फल और अन्न प्रसाद ग्रहण करवाकर उनका आशीर्वाद लिया गया। धार्मिक आयोजनों के साथ सेवा और सामाजिक समरसता का भाव भी दिखाई दिया। शेरगढ़ विधायक बाबू सिंह राठौड़ ने जनप्रतिनिधियों के साथ किए दर्शन भाद्रपद शुक्ल पक्ष त्रयोदशी के अवसर पर शेरगढ़ विधायक बाबू सिंह राठौड़ भी बालेसर के नवनिर्वाचित भाजपा पार्षदों के साथ जसोलधाम पहुंचे। उनके साथ 21 और 22 सितंबर को निर्वाचित अध्यक्ष एवं उपाध्यक्ष भी मौजूद रहे। विधायक राठौड़ और जनप्रतिनिधियों ने श्री राणीसा भटियाणीसा के दर्शन-पूजन कर बालेसर सहित राजस्थान में सुख-शांति, समृद्धि, खुशहाली, धन-धान्य और जनकल्याण की मंगलकामना की। ढोल-थाली की टंकार के बीच दिखी मालाणी की लोक संस्कृति त्रयोदशी के आयोजन में मालाणी की लोक संस्कृति की झलक भी देखने को मिली। स्थानीय दमामियों और बाड़मेर क्षेत्र के हड़वा से पहुंचे मांगणियार कलाकारों ने ढोल-थाली की टंकार के बीच भजनों की प्रस्तुतियां दीं। भक्ति गीतों से श्रद्धालु भावविभोर नजर आए। छप्पन भोग और भोजन प्रसादी के दौरान पारंपरिक गैर नृत्य और घोड़ा नृत्य की प्रस्तुतियां भी हुईं। लोक वाद्यों और पारंपरिक नृत्य ने जसोलधाम के धार्मिक माहौल में लोक संस्कृति के रंग भर दिए। त्रयोदशी की पूर्व संध्या पर रात्रि जागरण भी आयोजित किया गया। इसमें स्थानीय भजन कलाकारों ने श्री राणीसा भटियाणीसा की महिमा से जुड़े भजनों की प्रस्तुतियां दीं। सीसीटीवी निगरानी, मिस्टिंग सिस्टम और गोल्फ कार्ट की सुविधा श्रद्धालुओं की भारी संख्या को देखते हुए मंदिर संस्थान की ओर से सुरक्षा और सुविधा के लिए व्यापक इंतजाम किए गए। मंदिर परिसर और प्रमुख स्थानों पर लगे सीसीटीवी कैमरों से लगातार निगरानी रखी गई। पब्लिक अनाउंसमेंट सिस्टम के जरिए श्रद्धालुओं को दर्शन मार्ग, प्रवेश-निकास, प्रसादी स्थल और अन्य व्यवस्थाओं की जानकारी दी गई। गर्मी से राहत के लिए मिस्टिंग सिस्टम चलाया गया। बुजुर्ग और दिव्यांग श्रद्धालुओं के लिए व्हीलचेयर और गोल्फ कार्ट की सुविधा उपलब्ध रही। इसके अलावा बैठने की व्यवस्था, प्रसाद अर्पण की प्रणाली, पैदल पुल, भोजन प्रसादी, शीतल पेयजल और ठहरने की सुविधाएं भी उपलब्ध कराई गईं। श्रद्धालुओं की आवाजाही को व्यवस्थित रखने के लिए संस्थान की टीम और सुरक्षा कार्मिक विभिन्न स्थानों पर तैनात रहे। रिवरफ्रंट पार्किंग में भोजन और पेयजल की व्यवस्था जसोलधाम पहुंचने वाले श्रद्धालुओं के वाहनों के लिए संस्थान की ओर से विकसित रिवरफ्रंट पार्किंग में व्यवस्थित पार्किंग की व्यवस्था की गई। यहां श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए निःशुल्क भोजन प्रसादी और शीतल पेयजल भी उपलब्ध कराया गया। ‘श्रद्धालुओं की सेवा हमारा प्रथम ध्येय’ संस्थान के प्रवक्ता कुँवर हरिश्चंद्र सिंह जसोल ने कहा कि श्रद्धालुओं की सेवा, सुविधा और सुगम दर्शन संस्थान की प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि जसोलधाम आने वाला प्रत्येक श्रद्धालु संस्थान के लिए सम्माननीय है। बढ़ती श्रद्धालु संख्या को ध्यान में रखते हुए दर्शन व्यवस्था, भोजन प्रसादी, पेयजल, आवास, पार्किंग तथा बुजुर्ग और दिव्यांग श्रद्धालुओं की सहायता जैसी सुविधाओं का लगातार विस्तार किया जा रहा है। पुलिस और संस्थान के समन्वय से व्यवस्थाएं रहीं सुचारु संस्थान के ट्रस्ट सदस्य एवं सुरक्षा समिति अध्यक्ष कर्नल शंभू सिंह देवड़ा ने बताया कि त्रयोदशी प्रमुख धार्मिक दिवसों में से एक है। इस दिन बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने को देखते हुए सुरक्षा और दर्शन व्यवस्था पर विशेष ध्यान दिया गया। मंदिर परिसर और आसपास के प्रमुख क्षेत्रों में सीसीटीवी निगरानी, सुरक्षा कार्मिकों की तैनाती और प्रवेश-निकास मार्गों का सुव्यवस्थित संचालन किया गया। पब्लिक अनाउंसमेंट सिस्टम के माध्यम से श्रद्धालुओं को लगातार मार्गदर्शन दिया गया। उन्होंने बताया कि जिला पुलिस प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था, यातायात प्रबंधन और श्रद्धालुओं की आवाजाही में संस्थान का सहयोग किया। भारी भीड़ के बावजूद श्रद्धालुओं ने कतारबद्ध दर्शन व्यवस्था का पालन किया। एक पेड़ माँ माजीसा के नाम अभियान का शुभारंभ श्री राणीसा भटियाणीसा के पावन दिवसों में सबसे प्रमुख दिवसों में से एक भाद्रपद शुक्ल पक्ष त्रयोदशी के पावन अवसर पर संस्थान द्वारा जनआस्था को प्रकृति संरक्षण से जोड़ते हुए “एक पेड़ माँ माजीसा के नाम” अभियान का शुभारंभ किया गया। संस्थान अध्यक्ष रावल किशन सिंह जसोल के मार्गदर्शन में प्रारंभ इस अभियान के माध्यम से आगामी एक वर्ष में माँ माजीसा के भक्तों की सहभागिता से 13 लाख खेजड़ी के पौधे लगाने का महासंकल्प लिया गया है। श्रद्धा, सेवा और प्रकृति संरक्षण को एक सूत्र में जोड़कर जन-जन तक पहुंचाने की दिशा में यह संस्थान की विशेष पहल है। अभियान का शुभारंभ संस्थान अध्यक्ष रावल किशन सिंह जसोल ने स्वयं खेजड़ी का पौधा रोपकर किया। अभियान का प्रथम पौधा उनके निज निवास रावलगढ़, जसोल में तथा दूसरा पौधा संस्थान परिसर में उनके द्वारा रोपित किया गया। इसी पावन अवसर पर अभियान को व्यापक जनभागीदारी से जोड़ते हुए संस्थान की ओर से 13 हजार खेजड़ी के पौधे श्रद्धालुओं को निःशुल्क वितरित किए गए। श्रद्धालु इन पौधों को माँ माजीसा के आशीर्वाद और प्रकृति संरक्षण के पवित्र संकल्प के रूप में श्रद्धापूर्वक अपने साथ लेकर गए। संस्थान द्वारा देश-प्रदेश में निवासरत मां माजीसा के श्रद्धालुओं से अपने घर, खेत, गांव, सार्वजनिक स्थल एवं अन्य उपयुक्त स्थानों पर स्वयं पौधों की व्यवस्था कर माँ माजीसा के नाम खेजड़ी का पौधा रोपने और इस अभियान में सहभागी बनने का आह्वान किया गया है। श्रद्धालुओं की व्यापक सहभागिता से आगामी एक वर्ष में 13 लाख खेजड़ी के पौधे लगाने के महासंकल्प को साकार करते हुए मरुधरा में हरियाली के विस्तार और खेजड़ी के संरक्षण-संवर्धन की व्यापक जनभावना विकसित की जाएगी। इस अभियान के साथ एक विशेष आध्यात्मिक भाव भी जुड़ा है। मां माजीसा के नाम से रोपित प्रत्येक खेजड़ी को माँ माजीसा की जीवंत मूर्ति के रूप में श्रद्धापूर्वक स्वीकार करते हुए उसकी सेवा को माँ माजीसा की सेवा तथा उसकी पूजा को माँ माजीसा की पूजा के पवित्र भाव से जोड़ा गया है। श्रद्धालु अपने द्वारा रोपित खेजड़ी का आगामी 12 वर्षों तक नियमित सिंचन, देखरेख, सुरक्षा, सेवा और संवर्धन करेंगे। पौधे से सुदृढ़ वृक्ष बनने तक उसकी सेवा-पूजा का यह क्रम माँ माजीसा के प्रति श्रद्धा और प्रकृति के प्रति समर्पण का 12 वर्षीय पवित्र सेवा-अनुष्ठान बनेगा। इस सेवा-अनुष्ठान को निरंतर जीवंत और प्रेरणादायी बनाए रखने के लिए श्रद्धालुओं से आग्रह किया गया है कि प्रत्येक वर्ष भाद्रपद शुक्ल पक्ष त्रयोदशी के पावन दिवस पर अपने द्वारा रोपित खेजड़ी के पौधे अथवा विकसित वृक्ष के साथ सेल्फी लेकर जसोलधाम के आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल को टैग करते हुए उसकी प्रगति साझा करें। प्रतिवर्ष साझा की जाने वाली ये तस्वीरें पौधे से वृक्ष बनने तक की यात्रा को संजोएंगी और अन्य श्रद्धालुओं को भी आस्था से जुड़े इस प्रकृति संरक्षण अभियान में सहभागी बनने की प्रेरणा देंगी। ‘एक पेड़ मां माजीसा के नाम’ अभियान के तहत एक वर्ष में 13 लाख खेजड़ी का रोपण तथा प्रत्येक रोपित खेजड़ी की आगामी 12 वर्षों तक माँ माजीसा की जीवंत मूर्ति के भाव से सेवा-पूजा मरुधरा में हरियाली के विस्तार के साथ प्रकृति संरक्षण की स्थायी जनपरंपरा का स्वरूप लेगी। माँ माजीसा के नाम से रोपित और श्रद्धा से संवर्धित ये खेजड़ी वृक्ष आने वाली पीढ़ियों के लिए आस्था, सेवा, पर्यावरण संरक्षण और प्रकृति के प्रति उत्तरदायित्व की जीवंत धरोहर बनेंगे। त्रयोदशी की रात विशेष भजन संध्या और आरती का लाइव प्रसारण त्रयोदशी की रात्रि में विशेष जागरण और भजन संध्या का आयोजन किया जाएगा। इसमें मांगणियार कलाकार अपनी पारंपरिक गायन शैली में श्री राणीसा भटियाणीसा की महिमा से जुड़े भजनों की प्रस्तुति देंगे। इसके साथ विशेष आरती का लाइव प्रसारण भी किया जाएगा, ताकि देश-विदेश में रहने वाले श्रद्धालु अपने घर से ही मां की आरती और दर्शन का लाभ ले सकें।