जयपुर विकास प्राधिकरण (JDA) ने चिमनपुरा में कथित अवैध व्यावसायिक दुकानों पर सीलिंग की कार्रवाई की है। जयपुर के मास्टर प्लान और भूमि उपयोग के उल्लंघन से जुड़े मामलों में एक्शन किया गया। चिमनपुरा में जमीन के उपयोग और व्यावसायिक निर्माण को लेकर लंबे समय से विवाद चल रहा है। दरअसल, सुप्रीम कोर्ट ने 4 अगस्त 2026 के आदेश में JDA क्षेत्र में मास्टर प्लान के अनुसार निर्धारित भूमि उपयोग के कथित उल्लंघन पर गंभीर चिंता जताई थी। कोर्ट के सामने आया था कि JDA को सौंपी गई कृषि या खुली जमीन पर भी कथित तौर पर अतिक्रमण और व्यावसायिक निर्माण हुए। कोर्ट ने यह भी नोट किया कि JDA की कार्रवाई के बाद संबंधित पक्ष अपीलीय ट्रिब्यूनल पहुंच गए। लंबे समय तक अंतरिम आदेशों के कारण कार्रवाई आगे नहीं बढ़ सकी। सुप्रीम कोर्ट ने लंबित मामलों को दो सप्ताह में तय करने के निर्देश दिए और ट्रिब्यूनल के पीठासीन अधिकारी को अनुपालन के लिए व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदार बताया। चिमनपुरा मामले में JDA की कार्रवाई के बाद संबंधित पक्षों की ओर से अलग-अलग स्तरों पर राहत लिए जाने के दावे सामने आए हैं। JDA अपीलीय ट्रिब्यूनल के अलावा राजस्व मंडल और संभागीय आयुक्त स्तर पर भी आदेश होने की बात कही गई है। ऐसे में अब सबसे अहम सवाल यह है कि इन आदेशों का वास्तविक दायरा क्या है। क्या वे मौजूदा सीलिंग या आगे की प्रवर्तन कार्रवाई पर प्रभाव डालते हैं। इससे पहले जयपुर संभागीय आयुक्त वी. सरवाना ने 19 अगस्त को अपील संख्या 877/2025 में JDA जोन-2 के 16 सितंबर 2005 के 90-B आदेश के प्रभाव पर अंतरिम रोक लगाई थी। इस मामले में राजदरबार पिंक सिटी प्रोजेक्ट से जुड़ी जमीन भी शामिल है। अपीलकर्ताओं की ओर से मूल 90-B कार्रवाई में उचित नोटिस नहीं दिए जाने का आरोप लगाया गया था। मामले की अगली सुनवाई 22 सितंबर को प्रस्तावित है। SC की टिप्पणी के बाद कार्रवाई पर बढ़ा दबाव सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया था कि मास्टर प्लान में किसी जमीन का उपयोग किसी विशेष उद्देश्य के लिए निर्धारित है तो उसका दूसरे उद्देश्य के लिए इस्तेमाल नियमों के अनुरूप होना चाहिए। कोर्ट के सामने JDA की ओर से कथित अवैध निर्माणों के खिलाफ सीलिंग और ध्वस्तीकरण कार्रवाई शुरू किए जाने की जानकारी भी रखी गई थी। सीलिंग के बाद अब सबसे बड़ा सवाल आगे की कार्रवाई को लेकर है। संबंधित निर्माणों की स्वीकृति, भूमि उपयोग, JDA के रिकॉर्ड और अदालत से मिली मौजूदा राहत की स्थिति की जांच के बाद ही अगला कदम तय होगा। निर्माण नियमों के खिलाफ पाए जाते हैं और प्रभावी न्यायिक रोक नहीं है, तो नियमानुसार ध्वस्तीकरण की कार्रवाई का रास्ता खुल सकता है। सुप्रीम कोर्ट की सख्ती के बाद अब JDA की कार्रवाई पर भी नजर है। क्योंकि यह हालत सिर्फ चिमनपुरा की दुकानों का नहीं, बल्कि मास्टर प्लान में तय जमीन का इस्तेमाल बदलकर निर्माण खड़ा होने और उसके बाद कार्रवाई लंबे समय तक अटकने की पूरी व्यवस्था का है।