झालावाड़ मेडिकल कॉलेज में शुक्रवार को एंटी-रैगिंग कमेटी की बैठक हुई। इसमें कॉलेज परिसर और हॉस्टलों में रैगिंग रोकने पर चर्चा की गई। स्टूडेंट्स के लिए सुरक्षित, अनुशासित और सकारात्मक माहौल बनाने पर जोर दिया गया। बैठक की अध्यक्षता कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ. संजय पोरवाल और एसडीएम सोनू कुमारी ने की। वरिष्ठ स्टूडेंट्स से बात करते हुए उन्हें रैगिंग से दूर रहने को कहा गया। उनसे जूनियर स्टूडेंट्स के साथ सहयोग और सम्मान से पेश आने की अपील की गई। अधिकारियों ने कहा कि सीनियर स्टूडेंट्स को अपने अनुभव और मार्गदर्शन से नए स्टूडेंट्स की मदद करनी चाहिए। इससे उन्हें किसी तरह की परेशानी या मानसिक दबाव का सामना नहीं करना पड़ेगा। 'स्टूडेंट्स में अनुशासन और सौहार्द की भावना विकसित करना जरूरी' एंटी-रैगिंग कमेटी के कन्वीनर और विभागाध्यक्ष डॉ. के.एम. लोधा ने कहा कि कॉलेज में रैगिंग के प्रति शून्य सहनशीलता की नीति है। स्टूडेंट्स में आपसी सम्मान, अनुशासन और सौहार्द की भावना विकसित करना जरूरी है। उन्होंने कहा कि सीनियर स्टूडेंट्स को जूनियर स्टूडेंट्स के लिए सकारात्मक मार्गदर्शक बनना चाहिए। डॉ. लोधा ने बताया कि रैगिंग से स्टूडेंट्स के मन पर बुरा असर पड़ता है। कॉलेज परिसर में किसी भी तरह का मानसिक उत्पीड़न बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। स्टूडेंट्स को नियमों की जानकारी देने और उन्हें जिम्मेदार व्यवहार के लिए प्रेरित करने पर भी जोर दिया गया। जागरूकता गतिविधियां बढ़ाने पर भी चर्चा बैठक में रैगिंग रोकने के लिए जागरूकता गतिविधियां बढ़ाने पर भी चर्चा हुई। स्टूडेंट्स को एंटी-रैगिंग नियमों की जानकारी देने और किसी भी शिकायत पर तुरंत कार्रवाई करने पर सहमति बनी। कॉलेज परिसर और हॉस्टलों में निगरानी और अनुशासन व्यवस्था को मजबूत बनाने पर भी विचार किया गया। बैठक में एंटी-रैगिंग कमेटी के सदस्य और कॉलेज प्रशासन के अधिकारी मौजूद थे। अधिकारियों ने स्टूडेंट्स से अपील की कि रैगिंग या उत्पीड़न की कोई भी जानकारी मिलने पर तुरंत कॉलेज प्रशासन को बताएं। इससे समय पर जरूरी कार्रवाई की जा सकेगी।